<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	>
<channel>
	<title>Comments on: कवि या फेफड़ों के डाक्टर?</title>
	<atom:link href="http://nuktachini.debashish.com/120/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://nuktachini.debashish.com/120</link>
	<description>निंदक नीयर राखिये</description>
	<pubDate>Thu, 21 Aug 2008 19:41:16 +0000</pubDate>
	<generator>http://wordpress.org/?v=2.6</generator>
		<item>
		<title>By: Debashish</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/120#comment-164</link>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Apr 2006 08:09:59 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://nuktachini.debashish.com/120#comment-164</guid>
		<description>बेशक यह व्यक्तिगत पसंद की बात है पर प्रसून के गीत धुन पर बिठाये गये हैं यह स्पष्ट दिखता है। फिल्म का शीर्षक गीत, जिसका मैंने ज़िक्र किया, की पहली पंक्ति में "मेरी, मेरे, की, की " की बेवजह उपस्थिति पर गौर कीजिये, मीटर जमाने के लिये बेवजह ठूंसे शब्द नहीं तो क्या है? "सांसो में लहू", यह कैसा विन्यास है? "धौंकनी वाली" या "धौंकनी जैसी"? ठीक उलट अख़्तर साहब के लिखे "एक दो तीन" गीत से तौलें, टोटल टपोरी गीत, पर एक भी शब्द गीत से अलग नहीं मालूम पड़ता।

समीर को आप गीतकार मानते हैं यह उनको पता चल जाय तो वे बल्लियों उछल पड़ें, उनके हर गीत में पात्र महज़ "प्यार में हद से गुज़र जाने" के अलावा कुछ और कह पाते हैं भला? गुलज़ार और जावेद जैसे गीतकार और शायर से इनकी तुलना करना ही व्यर्थ है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बेशक यह व्यक्तिगत पसंद की बात है पर प्रसून के गीत धुन पर बिठाये गये हैं यह स्पष्ट दिखता है। फिल्म का शीर्षक गीत, जिसका मैंने ज़िक्र किया, की पहली पंक्ति में &#8220;मेरी, मेरे, की, की &#8221; की बेवजह उपस्थिति पर गौर कीजिये, मीटर जमाने के लिये बेवजह ठूंसे शब्द नहीं तो क्या है? &#8220;सांसो में लहू&#8221;, यह कैसा विन्यास है? &#8220;धौंकनी वाली&#8221; या &#8220;धौंकनी जैसी&#8221;? ठीक उलट अख़्तर साहब के लिखे &#8220;एक दो तीन&#8221; गीत से तौलें, टोटल टपोरी गीत, पर एक भी शब्द गीत से अलग नहीं मालूम पड़ता।</p>
<p>समीर को आप गीतकार मानते हैं यह उनको पता चल जाय तो वे बल्लियों उछल पड़ें, उनके हर गीत में पात्र महज़ &#8220;प्यार में हद से गुज़र जाने&#8221; के अलावा कुछ और कह पाते हैं भला? गुलज़ार और जावेद जैसे गीतकार और शायर से इनकी तुलना करना ही व्यर्थ है।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: ई-स्वामी</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/120#comment-163</link>
		<dc:creator>ई-स्वामी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Apr 2006 18:05:53 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://nuktachini.debashish.com/120#comment-163</guid>
		<description>फ़ूल जो बाग की ज़ीनत ठहरा
मेरी आंखों मे खिला था पहले! :)
प्रसून जोशी ने निराश मुझे कतई निराश नही किया और &lt;a href="http://hindini.com/eswami/?p=8" rel="nofollow"&gt;मेरी फ़िक्र को बेबुनियाद साबित कर दिया&lt;/a&gt; .. एक साल पहले ही फ़िर मिलेंगे के समय ही लग गया था की समीर जैसों का एन्टी-डॉट मिल गया है! और अब तो मेरे नए फ़ेवरिट लिरिसिस्ट बन गए हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>फ़ूल जो बाग की ज़ीनत ठहरा<br />
मेरी आंखों मे खिला था पहले! <img src='http://nuktachini.debashish.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /><br />
प्रसून जोशी ने निराश मुझे कतई निराश नही किया और <a href="http://hindini.com/eswami/?p=8" rel="nofollow">मेरी फ़िक्र को बेबुनियाद साबित कर दिया</a> .. एक साल पहले ही फ़िर मिलेंगे के समय ही लग गया था की समीर जैसों का एन्टी-डॉट मिल गया है! और अब तो मेरे नए फ़ेवरिट लिरिसिस्ट बन गए हैं.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: अनूप शुक्ला</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/120#comment-162</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ला</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Apr 2006 17:23:54 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://nuktachini.debashish.com/120#comment-162</guid>
		<description>देशप्रेम का जज्बा उड़ न रहा है हवा में धुक-धुक-धुक!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>देशप्रेम का जज्बा उड़ न रहा है हवा में धुक-धुक-धुक!</p>
]]></content:encoded>
	</item>
</channel>
</rss>
