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	<title>Comments on: सत्ता का भोग</title>
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	<description>निंदक नीयर राखिये</description>
	<pubDate>Fri, 29 Aug 2008 21:12:05 +0000</pubDate>
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		<title>By: Debashish</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/128#comment-194</link>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 May 2006 18:27:44 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;b&gt;आशीष, संजयः&lt;/b&gt; शुक्रिया

&lt;b&gt;अनुनादः&lt;/b&gt; काँग्रेसी सामंती राज में राजकुँवर यों ही तख्त की ओर कदम बढ़ाते हैं। राजीव की कल्पना कीजिये, उनकी शैक्षणिक या प्रशासनिक योग्यता भी क्या थी। फिर पार्टी कैडर से जुड़े और आस्ते आस्ते रास्ता बना लिया। इनके मुँह में चाँदी का चम्मच तो है ही। विरले ही होता है जब मनमोहन जैसे गुणी और योग्य व्यक्ति ऐसे महान पद को सुशोभित करें। दुखद बात यह है कि उनकी उल्टी गिनती शुरु हो गई है।

&lt;b&gt;रविः&lt;/b&gt;आपका कहना सही है। अर्जुन सिंह अमर होने के ख्वाहिशमंद दिखते हैं। नहीं मालूम कि बाद में उनके चित्र पर मालाऐं फूलों की होंगी या जूतों की।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><b>आशीष, संजयः</b> शुक्रिया</p>
<p><b>अनुनादः</b> काँग्रेसी सामंती राज में राजकुँवर यों ही तख्त की ओर कदम बढ़ाते हैं। राजीव की कल्पना कीजिये, उनकी शैक्षणिक या प्रशासनिक योग्यता भी क्या थी। फिर पार्टी कैडर से जुड़े और आस्ते आस्ते रास्ता बना लिया। इनके मुँह में चाँदी का चम्मच तो है ही। विरले ही होता है जब मनमोहन जैसे गुणी और योग्य व्यक्ति ऐसे महान पद को सुशोभित करें। दुखद बात यह है कि उनकी उल्टी गिनती शुरु हो गई है।</p>
<p><b>रविः</b>आपका कहना सही है। अर्जुन सिंह अमर होने के ख्वाहिशमंद दिखते हैं। नहीं मालूम कि बाद में उनके चित्र पर मालाऐं फूलों की होंगी या जूतों की।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>By: anunad</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/128#comment-193</link>
		<dc:creator>anunad</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 May 2006 09:39:37 +0000</pubDate>
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		<description>राहुल को अनुभवहीन कहने के बजाय अयोग्य कहना अधिक उपयुक्त होगा &#124; ऐसे लोगों से क्या आशा करें जो सर्वोत्कृष्ट सुविधाएँ प्राप्त करके भी सर्वगुणविहीन हैं &#124; आज तक राहुल को कुछ विचारोत्तेजक बात कहते हुए मैने नहीं सुना &#124;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>राहुल को अनुभवहीन कहने के बजाय अयोग्य कहना अधिक उपयुक्त होगा | ऐसे लोगों से क्या आशा करें जो सर्वोत्कृष्ट सुविधाएँ प्राप्त करके भी सर्वगुणविहीन हैं | आज तक राहुल को कुछ विचारोत्तेजक बात कहते हुए मैने नहीं सुना |</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: ratna</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/128#comment-192</link>
		<dc:creator>ratna</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 May 2006 08:03:23 +0000</pubDate>
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		<description>सत्ता का भोग वो भोग है जिसे भोगने के बाद हर भोग फीका लगता है यह वो लत है जिसका कोई इलाज नहीं ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सत्ता का भोग वो भोग है जिसे भोगने के बाद हर भोग फीका लगता है यह वो लत है जिसका कोई इलाज नहीं ।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
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		<title>By: रवि</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/128#comment-191</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 May 2006 04:57:16 +0000</pubDate>
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		<description>और, असली रंग तो अर्जुन सिंह दिखा रहे हैं. ओल्ड मैन इन ए रीयल हरी की तर्ज पर.

उन्हें लग रहा है कि उन्हें आर पार की लड़ाई लड़ ही लेनी चाहिए. आरक्षण के मुद्दे ने तो उन्हें राष्ट्रीय न्यूज पर बैठा ही दिया है, वे सुरक्षा मामलों पर गृहमंत्री पाटिल से भी भिड़ रहे हैं और अब सीधे पीएम का नाम ले रहे है- ओबीसी राजनीति का अपना दांव आगे खेलने.


भारतीय राजनीति कीचड़ और दलदल बन चुकी है- कोई भी भला आदमी इसमें जाकर कीचड़ मय ही हो जाएगा - अमिताभ बच्चन ने सही कहा था...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>और, असली रंग तो अर्जुन सिंह दिखा रहे हैं. ओल्ड मैन इन ए रीयल हरी की तर्ज पर.</p>
<p>उन्हें लग रहा है कि उन्हें आर पार की लड़ाई लड़ ही लेनी चाहिए. आरक्षण के मुद्दे ने तो उन्हें राष्ट्रीय न्यूज पर बैठा ही दिया है, वे सुरक्षा मामलों पर गृहमंत्री पाटिल से भी भिड़ रहे हैं और अब सीधे पीएम का नाम ले रहे है- ओबीसी राजनीति का अपना दांव आगे खेलने.</p>
<p>भारतीय राजनीति कीचड़ और दलदल बन चुकी है- कोई भी भला आदमी इसमें जाकर कीचड़ मय ही हो जाएगा - अमिताभ बच्चन ने सही कहा था&#8230;</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: PANKAJ</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/128#comment-190</link>
		<dc:creator>PANKAJ</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 May 2006 04:48:39 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत सही कहा आपने.... 

आखिर है तो यह राजनिति ही. जब समाज के हर क्षेत्र में राजनिति चलती है तो यह राजनैतिक पार्टीयों में तो यह होना ही है</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत सही कहा आपने&#8230;. </p>
<p>आखिर है तो यह राजनिति ही. जब समाज के हर क्षेत्र में राजनिति चलती है तो यह राजनैतिक पार्टीयों में तो यह होना ही है</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/128#comment-189</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 May 2006 04:07:11 +0000</pubDate>
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		<description>देबु दा काफी समय के बाद आप लिख रहे हैं, आपकी वापसी सुखद रही, 'जस्ट वाना..' के बाद यह लेख भी काफी अच्छा हैं. आपने सही कहा धर्म कि तरह सत्ता भी अफिम के नशे जैसी हैं. एक बार लत लग जाये तो न देश दिखता हैं, न जनता. अर्जुनसिंह को ही ले, अपने क्षणीक लाभ के लिए- कुछ दिन और कुर्सी पर बने रहने के लिए जो आरक्षण का दांव खेला हैं, इसका दुष्परिणाम देश लम्बे काल तक भोगेगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>देबु दा काफी समय के बाद आप लिख रहे हैं, आपकी वापसी सुखद रही, &#8216;जस्ट वाना..&#8217; के बाद यह लेख भी काफी अच्छा हैं. आपने सही कहा धर्म कि तरह सत्ता भी अफिम के नशे जैसी हैं. एक बार लत लग जाये तो न देश दिखता हैं, न जनता. अर्जुनसिंह को ही ले, अपने क्षणीक लाभ के लिए- कुछ दिन और कुर्सी पर बने रहने के लिए जो आरक्षण का दांव खेला हैं, इसका दुष्परिणाम देश लम्बे काल तक भोगेगा.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
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		<title>By: आशीष</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/128#comment-188</link>
		<dc:creator>आशीष</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 May 2006 04:02:49 +0000</pubDate>
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		<description>लेख अच्छा है ! सोनिया अनुभवहीन तो नही है, उनके हर कार्य से एक घाघ नेता की छवी नजर आती है ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>लेख अच्छा है ! सोनिया अनुभवहीन तो नही है, उनके हर कार्य से एक घाघ नेता की छवी नजर आती है ।</p>
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