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	<title>Comments on: भूसंपत्ति की कीमतें : मुख्यधारा का मीडिया अब चेता</title>
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	<description>निंदक नीयर राखिये</description>
	<pubDate>Fri, 29 Aug 2008 21:54:08 +0000</pubDate>
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		<title>By: Debashish</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/198#comment-2584</link>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Feb 2007 08:16:06 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;blockquote&gt;हैरानी की बात यह है कि प्याज और रसोई गैस जैसी छोटी-छोटी चीजों की कीमतें बढ़ने पर तो हंगामा खड़ा हो जाता है और सरकारें डगमगाने लगती हैं, लेकिन रीयल इस्टेट के बाजार में आए इस अनियंत्रित उछाल को लेकर कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं हो रही है।&lt;/blockquote&gt;बहुत बढ़िया लेख है सृजन आपका, मुझे ज्ञात होता तो जगदीश के साथ आप ये लेख लिखने के हकदार होते, आपके सभी तर्क अब भी लागू होते हैं। उपरोक्त वाक्य आपके लेख में पढ़ा तो मुझे अपनी इसी प्रविष्टि का निम्नलिखित लगभग ऐसा ही वाक्य याद आया। ये है मेरा वाक्य&lt;blockquote&gt;सबसे हैरत की बात यह लगी कि सामान्य तौर पर प्याज़ और आलू के दाम में बढ़त से भी परेशान हो जाने वाले लोग भूसंपत्ति की कीमत बढ़ने से खास चिंतित नहीं लगते थे।&lt;/blockquote&gt;अद्भुत साम्य!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>हैरानी की बात यह है कि प्याज और रसोई गैस जैसी छोटी-छोटी चीजों की कीमतें बढ़ने पर तो हंगामा खड़ा हो जाता है और सरकारें डगमगाने लगती हैं, लेकिन रीयल इस्टेट के बाजार में आए इस अनियंत्रित उछाल को लेकर कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं हो रही है।</p></blockquote>
<p>बहुत बढ़िया लेख है सृजन आपका, मुझे ज्ञात होता तो जगदीश के साथ आप ये लेख लिखने के हकदार होते, आपके सभी तर्क अब भी लागू होते हैं। उपरोक्त वाक्य आपके लेख में पढ़ा तो मुझे अपनी इसी प्रविष्टि का निम्नलिखित लगभग ऐसा ही वाक्य याद आया। ये है मेरा वाक्य<br />
<blockquote>सबसे हैरत की बात यह लगी कि सामान्य तौर पर प्याज़ और आलू के दाम में बढ़त से भी परेशान हो जाने वाले लोग भूसंपत्ति की कीमत बढ़ने से खास चिंतित नहीं लगते थे।</p></blockquote>
<p>अद्भुत साम्य!</p>
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		<title>By: सृजन शिल्पी</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/198#comment-2583</link>
		<dc:creator>सृजन शिल्पी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Feb 2007 06:16:10 +0000</pubDate>
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		<description>ठीक एक वर्ष पहले इसी विषय पर मेरे चिट्ठे पर प्रकाशित लेख "कब मिलेगा आवास का मौलिक अधिकार" को राष्ट्रीय सहारा ने 24 फरवरी, 2006 को अपने 'प्रोपर्टी' पृष्ठ पर प्रकाशित किया था, जिसमें रीयल इस्टेट की आसमान छूती कीमतों पर विस्तार से चर्चा की गई थी। लिंक निम्नवत है - http://srijanshilpi.com/?p=10</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ठीक एक वर्ष पहले इसी विषय पर मेरे चिट्ठे पर प्रकाशित लेख &#8220;कब मिलेगा आवास का मौलिक अधिकार&#8221; को राष्ट्रीय सहारा ने 24 फरवरी, 2006 को अपने &#8216;प्रोपर्टी&#8217; पृष्ठ पर प्रकाशित किया था, जिसमें रीयल इस्टेट की आसमान छूती कीमतों पर विस्तार से चर्चा की गई थी। लिंक निम्नवत है - <a href="http://srijanshilpi.com/?p=10" rel="nofollow">http://srijanshilpi.com/?p=10</a></p>
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