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	<title>Comments on: बाबू समझो इशारे</title>
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	<description>निंदक नीयर राखिये</description>
	<pubDate>Thu, 04 Dec 2008 00:20:02 +0000</pubDate>
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		<title>By: Debashish</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/247#comment-6802</link>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 00:16:12 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;b&gt;संजय:&lt;/b&gt; बात सक्रियता की नहीं है, रवि ने जैसा कहा, विरोधाभास की है। बार्क भारत की सर्वोत्कृष्ट सरकारी वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। इनसे उम्मीद रहती है कि ये देश को राह दिखायेंगे। समय के साथ तो हर कोई बदलता है, हम आईटी सुपरपावर बनने की बात कर रहे हैं, बार्क को तो पथ प्रशस्त करना है पर जब ये ही कूंयें के मैढक बने बैठे हैं तो दूसरों से क्या उम्मीद रखें? क्या आप किसी टीवी प्रतियोगिता में पोस्टकार्ड से जवाब मांगते हुये  देखते हैं ? बात यहाँ सिर्फ एसएमएस से कमाई की नहीं है, ये वक्त का तकाज़ा है, मोबाईल सुलभ है, पत्र के मुकाबले एसएमएस जल्दी पहुंचेगा, नतीजे स्वचालित रूप से निकाले जा सकते हैं, आदि। अगर ये ईमेल से रचना स्वीकार्य करते तो मैं रमण कौल द्वारा आदित्य सुदर्शन रचित  विज्ञान फंतासी कथा के इतनी &lt;a href="http://www.nirantar.org/1206/vatayan/kahani/asylum-at-bergen" rel="nofollow"&gt;मेहनत से किये हिन्दी अनुवाद&lt;/a&gt; को भेज देता।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><b>संजय:</b> बात सक्रियता की नहीं है, रवि ने जैसा कहा, विरोधाभास की है। बार्क भारत की सर्वोत्कृष्ट सरकारी वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। इनसे उम्मीद रहती है कि ये देश को राह दिखायेंगे। समय के साथ तो हर कोई बदलता है, हम आईटी सुपरपावर बनने की बात कर रहे हैं, बार्क को तो पथ प्रशस्त करना है पर जब ये ही कूंयें के मैढक बने बैठे हैं तो दूसरों से क्या उम्मीद रखें? क्या आप किसी टीवी प्रतियोगिता में पोस्टकार्ड से जवाब मांगते हुये  देखते हैं ? बात यहाँ सिर्फ एसएमएस से कमाई की नहीं है, ये वक्त का तकाज़ा है, मोबाईल सुलभ है, पत्र के मुकाबले एसएमएस जल्दी पहुंचेगा, नतीजे स्वचालित रूप से निकाले जा सकते हैं, आदि। अगर ये ईमेल से रचना स्वीकार्य करते तो मैं रमण कौल द्वारा आदित्य सुदर्शन रचित  विज्ञान फंतासी कथा के इतनी <a href="http://www.nirantar.org/1206/vatayan/kahani/asylum-at-bergen" rel="nofollow">मेहनत से किये हिन्दी अनुवाद</a> को भेज देता।</p>
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	<item>
		<title>By: sanjay tiwari</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/247#comment-6798</link>
		<dc:creator>sanjay tiwari</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jul 2007 09:43:31 +0000</pubDate>
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		<description>अब टिप्पड़ी कामवाली.
एक आश्रम है रिखिया (देवघर, झारखंड, भारत) में. स्वामी सत्यानंद सरस्वती का. वे भी ई-मेल वगैरह को पूरी तरह से प्रतिबंधित रखते हैं. आप चिट्ठी लिखिए वहां से चिट्ठी से जवाब आ जाएगा. हां, आप फोन कर सकते हैं वो भी समय तय है. पहले मुझे लगता था कि बहुत अवैज्ञानिक है यह सब. फिर लगा जिसने BSY जैसे प्रामाणिक योग विद्यालय रचा हो वह इतना अवैज्ञानिक तो कदापि नहीं हो सकता कि बिना सोचे-समझे ई-मेल को प्रतिबंधित कर दे. लेकिन मैं स्वामीजी के इस कदम की निंदा कदापि नहीं करता. सक्रियता के कई तल और विधाएं हैं. विधाओं में क्यों उलझें, सक्रियता है यही पर्याप्त है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अब टिप्पड़ी कामवाली.<br />
एक आश्रम है रिखिया (देवघर, झारखंड, भारत) में. स्वामी सत्यानंद सरस्वती का. वे भी ई-मेल वगैरह को पूरी तरह से प्रतिबंधित रखते हैं. आप चिट्ठी लिखिए वहां से चिट्ठी से जवाब आ जाएगा. हां, आप फोन कर सकते हैं वो भी समय तय है. पहले मुझे लगता था कि बहुत अवैज्ञानिक है यह सब. फिर लगा जिसने BSY जैसे प्रामाणिक योग विद्यालय रचा हो वह इतना अवैज्ञानिक तो कदापि नहीं हो सकता कि बिना सोचे-समझे ई-मेल को प्रतिबंधित कर दे. लेकिन मैं स्वामीजी के इस कदम की निंदा कदापि नहीं करता. सक्रियता के कई तल और विधाएं हैं. विधाओं में क्यों उलझें, सक्रियता है यही पर्याप्त है.</p>
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		<title>By: sanjay tiwari</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/247#comment-6797</link>
		<dc:creator>sanjay tiwari</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jul 2007 09:32:14 +0000</pubDate>
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		<description>वह सब तो ठीक है यह टिप्पड़ियों के साथ फोटो की जगह ------- जैसा क्या है? उसझन हो रही है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वह सब तो ठीक है यह टिप्पड़ियों के साथ फोटो की जगह &#8212;&#8212;- जैसा क्या है? उसझन हो रही है.</p>
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	<item>
		<title>By: रवि</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/247#comment-6796</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jul 2007 05:17:42 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;b&gt;"...विज्ञान लेख आमंत्रित किये गये हैं। इसके नियमों में एक जगह लिखा है, “इंटरनेट अथवा ईमेल द्वारा कृपया लेख न भेजें”..."&lt;/b&gt;

अजीब विरोधाभास है! कितना अवैज्ञानिक! 

हँसी भी नहीं आती!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><b>&#8220;&#8230;विज्ञान लेख आमंत्रित किये गये हैं। इसके नियमों में एक जगह लिखा है, “इंटरनेट अथवा ईमेल द्वारा कृपया लेख न भेजें”&#8230;&#8221;</b></p>
<p>अजीब विरोधाभास है! कितना अवैज्ञानिक! </p>
<p>हँसी भी नहीं आती!</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/247#comment-6795</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jul 2007 04:05:59 +0000</pubDate>
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		<description>यार ये सरकारी बाबू!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
कुछ नहीं कहना, इससे अच्छा है दिवार से सर फोड़ लें.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यार ये सरकारी बाबू!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!<br />
कुछ नहीं कहना, इससे अच्छा है दिवार से सर फोड़ लें.</p>
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		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/247#comment-6794</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jul 2007 01:53:25 +0000</pubDate>
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		<description>:) देबु दा...फिर कहता हूँ आपको समय ज्यादा उपलब्ध हो गया है..यहाँ आने की व्यवस्था करो मेरे पास. :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p> <img src='http://nuktachini.debashish.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> देबु दा&#8230;फिर कहता हूँ आपको समय ज्यादा उपलब्ध हो गया है..यहाँ आने की व्यवस्था करो मेरे पास. <img src='http://nuktachini.debashish.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: अरुण</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/247#comment-6793</link>
		<dc:creator>अरुण</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jul 2007 00:41:50 +0000</pubDate>
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		<description>भारत मे अमेरिका ब्रितैनी का कहा हमेशा सही मान लिया जाता है,अगर भारत के गांव पर भी खोज करनी हो तो अमूमन आदमी इस काम के लिये भी फ़हली फ़्लाईट पकड कर विदेश चला ही जाता है ज्यादा खून ना जलाये,दो पैग लगाये सो जाये...:)
हा देबाशीश जी आपके निंदक नियरै राखिये पर भी कुछ कहना है,मेल आई डी नही था इसलिये यही कह रहा हू.आपके लिये ..
निंदक नियरै राखिये ,लिखना अगर सुहाय
तो दिल से सौचे आपणै,पर निंदा मे ना जाय"
जरा सोचियेगा... पर निंदा को भी निंदक नियरै राखिये वाले स्वांत सुखाय नही करते है
खाली लिखिये नही आचरण मे भी लाईये,सबसे पहले अपने आचरण मे लाने के बाद ही दूसरे को कहना उचित रहता है,</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत मे अमेरिका ब्रितैनी का कहा हमेशा सही मान लिया जाता है,अगर भारत के गांव पर भी खोज करनी हो तो अमूमन आदमी इस काम के लिये भी फ़हली फ़्लाईट पकड कर विदेश चला ही जाता है ज्यादा खून ना जलाये,दो पैग लगाये सो जाये&#8230;:)<br />
हा देबाशीश जी आपके निंदक नियरै राखिये पर भी कुछ कहना है,मेल आई डी नही था इसलिये यही कह रहा हू.आपके लिये ..<br />
निंदक नियरै राखिये ,लिखना अगर सुहाय<br />
तो दिल से सौचे आपणै,पर निंदा मे ना जाय&#8221;<br />
जरा सोचियेगा&#8230; पर निंदा को भी निंदक नियरै राखिये वाले स्वांत सुखाय नही करते है<br />
खाली लिखिये नही आचरण मे भी लाईये,सबसे पहले अपने आचरण मे लाने के बाद ही दूसरे को कहना उचित रहता है,</p>
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