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	<title>Comments on: मैंक्या, हिन्दी दा पला तो हुआ!</title>
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	<description>निंदक नीयर राखिये</description>
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		<title>By: डा० अमर कुमार</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6992</link>
		<dc:creator>डा० अमर कुमार</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Dec 2007 18:15:17 +0000</pubDate>
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		<description>दिनेश का स्पष्टीकरण निंतात लीपापोती है । कभी रामपुर ( उ०प्र०) गया है, आपसब में से कोई ? हकीम सुन्दरलाल की कई &quot; असली&quot; शफ़ाखाने मिल जायेंगे, आपको ! ’ कमज़ोर क्यों रह्ते हो ?’ के विज्ञापनों में सभी जैन साहब असली ही हैं ! कुछ ऎसा ही माज़रा यहाँ भी है, लेकिन कुछ भी हो इससे हिंन्दी की महत्ता का मान बढ़ा ही है ! बनीबनायी लीक पकड़ने वाले को कुछ कहना ही बेकार है ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दिनेश का स्पष्टीकरण निंतात लीपापोती है । कभी रामपुर ( उ०प्र०) गया है, आपसब में से कोई ? हकीम सुन्दरलाल की कई &#8221; असली&#8221; शफ़ाखाने मिल जायेंगे, आपको ! ’ कमज़ोर क्यों रह्ते हो ?’ के विज्ञापनों में सभी जैन साहब असली ही हैं ! कुछ ऎसा ही माज़रा यहाँ भी है, लेकिन कुछ भी हो इससे हिंन्दी की महत्ता का मान बढ़ा ही है ! बनीबनायी लीक पकड़ने वाले को कुछ कहना ही बेकार है ।</p>
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		<title>By: Null Pointer</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6976</link>
		<dc:creator>Null Pointer</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Dec 2007 14:09:58 +0000</pubDate>
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		<description>[...] content to them. It is easy to understand why they needed an overnight growth in their content. Despite my objections to date the company has not removed the content they added without permission and still show blog [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] content to them. It is easy to understand why they needed an overnight growth in their content. Despite my objections to date the company has not removed the content they added without permission and still show blog [...]</p>
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		<title>By: आलोक</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6975</link>
		<dc:creator>आलोक</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Nov 2007 09:52:57 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;blockquote&gt;“कई चिट्ठे स्वयं चिट्ठाकारों द्वारा जोड़े जाते हैं” (Many of the blogs are submitted by the bloggers itself), ध्यान दें Many but not all यानि “सारे” चिट्ठे नहीं। और फ्रेम पेजेस में पोस्ट दिखाने का बारे में कोई सूचना देना उचित नहीं समझा गया क्योंकि यह तो “rule of the game” है&lt;/blockquote&gt;गूगल वाले जोड़ते हैं तो मूल कड़ी देते हैं। बिना मूल कड़ी दिए फ़्रेम में पन्ना दिखाना गूगल के खेल का नियम तो कतई नहीं है। 
गूगल वाले पूरी सामग्री के बगल में विज्ञापन नहीं लगाते हैं। यह भी गूगल के खेल का नियम तो कतई नहीं है।
गूगल वाले मुख पृष्ठ पर पॉपप नहीं लगाते हैं - पर उसे छोड़ो, पहले दो नियमों के बारे में ही बात करते हैं!

पुनश्च - यह टिप्पणी पिछली बार दैट्स हिंदी पर जाने के समय पाई जानकारी पर आधारित है। इस वक़्त पन्ना खुल नहीं पाया इसलिए देख नहीं सका कि वास्तव में अब क्या हालत है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>“कई चिट्ठे स्वयं चिट्ठाकारों द्वारा जोड़े जाते हैं” (Many of the blogs are submitted by the bloggers itself), ध्यान दें Many but not all यानि “सारे” चिट्ठे नहीं। और फ्रेम पेजेस में पोस्ट दिखाने का बारे में कोई सूचना देना उचित नहीं समझा गया क्योंकि यह तो “rule of the game” है</p></blockquote>
<p>गूगल वाले जोड़ते हैं तो मूल कड़ी देते हैं। बिना मूल कड़ी दिए फ़्रेम में पन्ना दिखाना गूगल के खेल का नियम तो कतई नहीं है।<br />
गूगल वाले पूरी सामग्री के बगल में विज्ञापन नहीं लगाते हैं। यह भी गूगल के खेल का नियम तो कतई नहीं है।<br />
गूगल वाले मुख पृष्ठ पर पॉपप नहीं लगाते हैं &#8211; पर उसे छोड़ो, पहले दो नियमों के बारे में ही बात करते हैं!</p>
<p>पुनश्च &#8211; यह टिप्पणी पिछली बार दैट्स हिंदी पर जाने के समय पाई जानकारी पर आधारित है। इस वक़्त पन्ना खुल नहीं पाया इसलिए देख नहीं सका कि वास्तव में अब क्या हालत है।</p>
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		<title>By: Debashish</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6974</link>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Nov 2007 09:19:04 +0000</pubDate>
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		<description>शुक्रिया दिनेश! यह स्पष्टिकरण आप स्वयं वॉटब्लॉग पर दें तो बेहतर होगा क्योंकि मैंने वही उद्धत किया जो आपने लिखा। ब्लॉग की प्रविष्टि (यदि पासवर्ड प्रोटेक्ट न की जाय) और इस पर टिप्पणीयाँ सार्वजनिक होती हैं और चुंकि आप संस्था की ओर से लिख रहे हैं तो इसे आधिकारिक वक्तव्य मानने में मेरी कोई भूल नहीं है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शुक्रिया दिनेश! यह स्पष्टिकरण आप स्वयं वॉटब्लॉग पर दें तो बेहतर होगा क्योंकि मैंने वही उद्धत किया जो आपने लिखा। ब्लॉग की प्रविष्टि (यदि पासवर्ड प्रोटेक्ट न की जाय) और इस पर टिप्पणीयाँ सार्वजनिक होती हैं और चुंकि आप संस्था की ओर से लिख रहे हैं तो इसे आधिकारिक वक्तव्य मानने में मेरी कोई भूल नहीं है।</p>
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	<item>
		<title>By: Dinesh Shrinet</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6973</link>
		<dc:creator>Dinesh Shrinet</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Nov 2007 09:07:59 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6973</guid>
		<description>प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, मेरे ख्याल से आपकी टिप्पणी के बाद कि यह दुर्भावनावश नहीं था, बात काफी हद तक स्पष्ट हो जाती है. मुख्य बात यही है कि हम यहां कुछ साबित नहीं करना चाहते सिर्फ अपना आशय स्पष्ट करना चाहते हैं. जैसा कि मैंने पहले कहा कि मैंने स्वतःस्फूर्त ढंग से बस आपकी टिप्पणी पर जवाब भेजा था, मुझे लगा कि शायद यह गलती से हुआ हो और आपको उसी विशेष खबर पर यह आपत्ति हो, मैंने भी अपनी बात रखी थी, मगर यह नहीं पता था कि मुझे कहीं &quot;कोट&quot; किया जाएगा. मैं यह मान सकता हूं कि यह भ्रम कहीं मेरे लिखने के तरीके से आपके मन में उपजा हो मगर यह है एक भ्रम ही. दरअसल आपकी प्रथम टिप्पणी के क्रम में ही मैं दोबारा यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि दैट्स हिन्दी की खबरें न्यूज एजेंसियों तथा निजी संवाददाताओं के माध्यम से ही ली जाती हैं. आपके द्वारा इंगित खबर भी यूनीवार्ता से जारी हुई है. आशा है पुनः मेरे स्प्ष्टीकरण के बाद अब इस बिंदु पर आपको कोई शिकायत नहीं होगी और आप यह समझ सकते होंगे कि इस तकनीकी बहस के बीच  watblog.com पर मेरी बात का गलत आशय चला गया है, जिसे कि आपने मेरी पिछली टिप्पणी के आधार पर ही &quot;कोट&quot; किया था, यदि आपको लगता है कि मेरा आशय स्पष्ट हो जाने के बाद आप watblog.com पर उसे स्पष्ट कर सकते हैं तो मुझे खुशी होगी. उम्मीद है कि आगे भी नुक्ताचीनी में दैट्स हिन्दी पर आपकी टिप्पणियां और सुझाव हमें मिलते रहेंगे.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, मेरे ख्याल से आपकी टिप्पणी के बाद कि यह दुर्भावनावश नहीं था, बात काफी हद तक स्पष्ट हो जाती है. मुख्य बात यही है कि हम यहां कुछ साबित नहीं करना चाहते सिर्फ अपना आशय स्पष्ट करना चाहते हैं. जैसा कि मैंने पहले कहा कि मैंने स्वतःस्फूर्त ढंग से बस आपकी टिप्पणी पर जवाब भेजा था, मुझे लगा कि शायद यह गलती से हुआ हो और आपको उसी विशेष खबर पर यह आपत्ति हो, मैंने भी अपनी बात रखी थी, मगर यह नहीं पता था कि मुझे कहीं &#8220;कोट&#8221; किया जाएगा. मैं यह मान सकता हूं कि यह भ्रम कहीं मेरे लिखने के तरीके से आपके मन में उपजा हो मगर यह है एक भ्रम ही. दरअसल आपकी प्रथम टिप्पणी के क्रम में ही मैं दोबारा यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि दैट्स हिन्दी की खबरें न्यूज एजेंसियों तथा निजी संवाददाताओं के माध्यम से ही ली जाती हैं. आपके द्वारा इंगित खबर भी यूनीवार्ता से जारी हुई है. आशा है पुनः मेरे स्प्ष्टीकरण के बाद अब इस बिंदु पर आपको कोई शिकायत नहीं होगी और आप यह समझ सकते होंगे कि इस तकनीकी बहस के बीच  watblog.com पर मेरी बात का गलत आशय चला गया है, जिसे कि आपने मेरी पिछली टिप्पणी के आधार पर ही &#8220;कोट&#8221; किया था, यदि आपको लगता है कि मेरा आशय स्पष्ट हो जाने के बाद आप watblog.com पर उसे स्पष्ट कर सकते हैं तो मुझे खुशी होगी. उम्मीद है कि आगे भी नुक्ताचीनी में दैट्स हिन्दी पर आपकी टिप्पणियां और सुझाव हमें मिलते रहेंगे.</p>
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	<item>
		<title>By: Debashish</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6972</link>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Nov 2007 07:59:39 +0000</pubDate>
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		<description>दिनेश जी, कृपया यह विचार मन से निकाल दें कि मैंने आपके या आपके संस्थान के प्रति किसी दुर्भावना के अंतर्गत कुछ लिखा। वनइंडिया के संचालकों या इस साईट के किसी भी व्यक्ति से मेरा परिचय ही नहीं है तो दुराभाव का क्या सवाल होता। ब्लॉग लेखक के तौर पर मैं केवल एक whistle blower के रूप में अपनी जिम्मेवारी निभा रहा हूं, जिस बात से मुख्यधारा का मीडिया जी चुराता है। स्वयं मैं भी &lt;a href=&quot;http://www.nirantar.org&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;निरंतर&lt;/a&gt;, &lt;a href=&quot;http://indibloggies.org&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;इंडीब्लॉगीज़&lt;/a&gt; और &lt;a href=&quot;http://www.podbharti.com&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;पॉडभारती&lt;/a&gt; जैसी अनेक साईटें संचालित करता हूँ और ध्यान रखता हूँ कि नीतियाँ स्पष्ट रहें। 

&lt;blockquote&gt;मैंने महज यह संभावना व्यक्त की थी कि शायद किसी ने इसे गूगल न्यूज से उठा लिया हो&lt;/blockquote&gt;आपने कहीं भी &quot;संभावना&quot; शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। आपकी टिप्पणी ऊपर अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकाशित है और जिसे &quot;प्रोफेशनल&quot; होने के नाते अपनी पोस्ट के अंत में स्पष्टिकरण के रूप में मैंने प्रकाशित भी किया। कृपया ये न सोचें कि जिम्मेवार लेखन केवल मुख्यधारा के मीडिया की बपौती है, मैंने जो भी लिखा जिम्मेवारी से लिखा और अपनी बात पर कायम हूँ। AOL से हुये आपकी संस्था के &lt;a href=&quot;http://www.alootechie.net/news/oneindia-to-power-aol%e2%80%99s-hindi-tamil-language-channels/&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;हालिया समझौते&lt;/a&gt; (जो कि मेरी मूल पोस्ट लिखने के बाद की घटना है) से यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि वनइंडिया पर इनआर्गेनिक रूप से बढ़त हासिल करने का कितना दबाव रहा होगा।

वनइंडिया ने वॉटब्लॉग पर ब्लॉग के Permalink बदल कर पोस्ट अपनी साईट पर फ्रेम पेजेस पर दिखाने और ब्लॉग को जोड़ने के पहले पूर्वनुमति लेने की बात पर लिखा है कि &quot;Many of the blogs are submitted by the bloggers itself&quot; और बड़े दंभ से यह कहा गया कि पर्मालिंक बदल कर ब्लॉग की गूगल रैंकिंग बढ़ाने में आप मदद कर रहे हैं। यह तर्क बेहद बेवकूफी भरा है।

रही बात समाचारों की तो मैंने अपनी पोस्ट पर जागरण पर भी छपे एक समाचार का हवाला देकर यह संशय भर प्रस्तुत किया था और सवालिया निशान लगाया था कि क्या ये सामग्री सिंडिकेटेड है? आपने स्पष्ट किया हाँ और यह मैंने अपनी पोस्ट को संपादित कर अपने पाठकों को स्पष्ट किया। आपका और मेरा पूर्ण संवाद इस पृष्ठ पर जस का तस प्रकाशित है, अब मेरे पाठक निर्णय लेंगे कि कौन सही और कौन गलत है।

आपकी संस्था को यह साधुवाद देना नहीं भूलना चाहता कि उन्होंने उठाये सवालों को गंभीरता से लिया और उनका जवाब दिया। मैं अपेक्षा करता हूं कि इसे constructive criticism मानते हुये अपनी नीतियों और कार्यकलाप में यथोचित बदलाव/सुधार करेंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दिनेश जी, कृपया यह विचार मन से निकाल दें कि मैंने आपके या आपके संस्थान के प्रति किसी दुर्भावना के अंतर्गत कुछ लिखा। वनइंडिया के संचालकों या इस साईट के किसी भी व्यक्ति से मेरा परिचय ही नहीं है तो दुराभाव का क्या सवाल होता। ब्लॉग लेखक के तौर पर मैं केवल एक whistle blower के रूप में अपनी जिम्मेवारी निभा रहा हूं, जिस बात से मुख्यधारा का मीडिया जी चुराता है। स्वयं मैं भी <a href="http://www.nirantar.org" rel="nofollow">निरंतर</a>, <a href="http://indibloggies.org" rel="nofollow">इंडीब्लॉगीज़</a> और <a href="http://www.podbharti.com" rel="nofollow">पॉडभारती</a> जैसी अनेक साईटें संचालित करता हूँ और ध्यान रखता हूँ कि नीतियाँ स्पष्ट रहें। </p>
<blockquote><p>मैंने महज यह संभावना व्यक्त की थी कि शायद किसी ने इसे गूगल न्यूज से उठा लिया हो</p></blockquote>
<p>आपने कहीं भी &#8220;संभावना&#8221; शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। आपकी टिप्पणी ऊपर अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकाशित है और जिसे &#8220;प्रोफेशनल&#8221; होने के नाते अपनी पोस्ट के अंत में स्पष्टिकरण के रूप में मैंने प्रकाशित भी किया। कृपया ये न सोचें कि जिम्मेवार लेखन केवल मुख्यधारा के मीडिया की बपौती है, मैंने जो भी लिखा जिम्मेवारी से लिखा और अपनी बात पर कायम हूँ। AOL से हुये आपकी संस्था के <a href="http://www.alootechie.net/news/oneindia-to-power-aol%e2%80%99s-hindi-tamil-language-channels/" rel="nofollow">हालिया समझौते</a> (जो कि मेरी मूल पोस्ट लिखने के बाद की घटना है) से यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि वनइंडिया पर इनआर्गेनिक रूप से बढ़त हासिल करने का कितना दबाव रहा होगा।</p>
<p>वनइंडिया ने वॉटब्लॉग पर ब्लॉग के Permalink बदल कर पोस्ट अपनी साईट पर फ्रेम पेजेस पर दिखाने और ब्लॉग को जोड़ने के पहले पूर्वनुमति लेने की बात पर लिखा है कि &#8220;Many of the blogs are submitted by the bloggers itself&#8221; और बड़े दंभ से यह कहा गया कि पर्मालिंक बदल कर ब्लॉग की गूगल रैंकिंग बढ़ाने में आप मदद कर रहे हैं। यह तर्क बेहद बेवकूफी भरा है।</p>
<p>रही बात समाचारों की तो मैंने अपनी पोस्ट पर जागरण पर भी छपे एक समाचार का हवाला देकर यह संशय भर प्रस्तुत किया था और सवालिया निशान लगाया था कि क्या ये सामग्री सिंडिकेटेड है? आपने स्पष्ट किया हाँ और यह मैंने अपनी पोस्ट को संपादित कर अपने पाठकों को स्पष्ट किया। आपका और मेरा पूर्ण संवाद इस पृष्ठ पर जस का तस प्रकाशित है, अब मेरे पाठक निर्णय लेंगे कि कौन सही और कौन गलत है।</p>
<p>आपकी संस्था को यह साधुवाद देना नहीं भूलना चाहता कि उन्होंने उठाये सवालों को गंभीरता से लिया और उनका जवाब दिया। मैं अपेक्षा करता हूं कि इसे constructive criticism मानते हुये अपनी नीतियों और कार्यकलाप में यथोचित बदलाव/सुधार करेंगे।</p>
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	<item>
		<title>By: Dinesh Shrinet</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6971</link>
		<dc:creator>Dinesh Shrinet</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Nov 2007 07:28:42 +0000</pubDate>
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		<description>देबाशीष जी, आपकी टिप्पणी सही न होते हुए भी (खबरें भी जागरण जैसे माध्यमों की फीड से चुरा रहे हैं ) उसको सम्मान देते हुए ही मैंने आपके ब्लाग में अपना पक्ष रखा था. मैंने महज यह संभावना व्यक्त की थी कि शायद किसी ने इसे गूगल न्यूज से उठा लिया हो. मगर आपने मेरे इस वक्तव्य को मेरी स्वीकारोक्ति मानकर उसे www.watblog.com पर प्रस्तुत कर दिया जो कि बिल्कुल गलत है. नुक्ताचीनी में आपने खबरें चुराने की बात जो कही थी वह भी सही नहीं है. वास्तविकता यह है कि हमने अपनी खबरों के लिए समाचार एजेंसी यूनीवार्ता (यूएनआई) और एएनआई को सब्सक्राइब कर रखा है. जिसकी खबरों को तमाम दूसरे समाचारपत्र और वेबसाइट्स भी लेती हैं. उपरोक्त मोबाइल की खबर भी यूनीवार्ता से ही ली गई है. जिसे आप उसी दिन की तमाम साइट्स और अखबारों मे देख सकते हैं. साइट सर्च करते वक्त मुझे आपकी यह टिप्पणी दिखी जो मुझे उचित नहीं लगी तो मैंने शिष्टाचारवश यह स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया व्यक्त की. कृपया मेरे शब्दों पर गौर करें (आपने जो उधार के कंटेट की बात लिखी है, वह महज एक भ्रम है. हम अपनी साइट पर दो न्यूज एजेंसियों तथा कुछ एंटरटेनमेंट एजेंसी तथा मुंबई स्थित हमारे कुछ विशेष संवाददाताओं की खबरें ही लेते हैं.) मुझे यह महज संभावना लगी कि शायद किसी ने इसे सर्च किया हो, मगर मेरी इस बात को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है. आपकी इस एक प्रोफेशनल होने के नाते आप इन बातों की गंभीरता को समझ सकते हैं. इससे हमारी साइट की साख को तथा खुद संस्थान में मेरी छवि को नुकसान पहुंचा है. मैं आपसे अपेक्षा करूंगा कि  www.watblog.com में आप इस पूरे प्रकरण में स्थिति को स्पष्ट करें.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>देबाशीष जी, आपकी टिप्पणी सही न होते हुए भी (खबरें भी जागरण जैसे माध्यमों की फीड से चुरा रहे हैं ) उसको सम्मान देते हुए ही मैंने आपके ब्लाग में अपना पक्ष रखा था. मैंने महज यह संभावना व्यक्त की थी कि शायद किसी ने इसे गूगल न्यूज से उठा लिया हो. मगर आपने मेरे इस वक्तव्य को मेरी स्वीकारोक्ति मानकर उसे <a href="http://www.watblog.com" rel="nofollow">http://www.watblog.com</a> पर प्रस्तुत कर दिया जो कि बिल्कुल गलत है. नुक्ताचीनी में आपने खबरें चुराने की बात जो कही थी वह भी सही नहीं है. वास्तविकता यह है कि हमने अपनी खबरों के लिए समाचार एजेंसी यूनीवार्ता (यूएनआई) और एएनआई को सब्सक्राइब कर रखा है. जिसकी खबरों को तमाम दूसरे समाचारपत्र और वेबसाइट्स भी लेती हैं. उपरोक्त मोबाइल की खबर भी यूनीवार्ता से ही ली गई है. जिसे आप उसी दिन की तमाम साइट्स और अखबारों मे देख सकते हैं. साइट सर्च करते वक्त मुझे आपकी यह टिप्पणी दिखी जो मुझे उचित नहीं लगी तो मैंने शिष्टाचारवश यह स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया व्यक्त की. कृपया मेरे शब्दों पर गौर करें (आपने जो उधार के कंटेट की बात लिखी है, वह महज एक भ्रम है. हम अपनी साइट पर दो न्यूज एजेंसियों तथा कुछ एंटरटेनमेंट एजेंसी तथा मुंबई स्थित हमारे कुछ विशेष संवाददाताओं की खबरें ही लेते हैं.) मुझे यह महज संभावना लगी कि शायद किसी ने इसे सर्च किया हो, मगर मेरी इस बात को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है. आपकी इस एक प्रोफेशनल होने के नाते आप इन बातों की गंभीरता को समझ सकते हैं. इससे हमारी साइट की साख को तथा खुद संस्थान में मेरी छवि को नुकसान पहुंचा है. मैं आपसे अपेक्षा करूंगा कि  <a href="http://www.watblog.com" rel="nofollow">http://www.watblog.com</a> में आप इस पूरे प्रकरण में स्थिति को स्पष्ट करें.</p>
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	<item>
		<title>By: Dinesh Shrinet</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6970</link>
		<dc:creator>Dinesh Shrinet</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Nov 2007 11:46:14 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6970</guid>
		<description>दैट्स हिन्दी के बारे में आपकी टिप्पणी पढ़ी, आपके सुझावों और आलोचनाओं का स्वागत है. मगर आपने जो उधार के कंटेट की बात लिखी है, वह महज एक भ्रम है. हम अपनी साइट पर दो न्यूज एजेंसियों तथा कुछ एंटरटेनमेंट एजेंसी तथा मुंबई स्थित हमारे कुछ विशेष संवाददाताओं की खबरें ही लेते हैं. साइट के शुरूआती दौर में भ्रमवश हमारी टीम में से किसी ने गूगल न्यूज की फीड से खबरें उठा लीं, बिना यह ध्यान दिए कि यह विशिष्ट साइट से जुडी है, (जैसा कि आप जानते हैं प्रिंट मीडिया में गूगल का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है.) दूसरी बात यह वन इंडिया का बदला संस्करण नहीं है बल्कि वन इंडिया के भाषाई संस्करणों की श्रृंखला के तहत इस शुरू किया गया है. दैट्स हिन्दी अभी अपना स्वरूप ग्रहण कर रही है, हम चाहते हैं कि नेट पर हिन्दी से जुड़े लोग इसे एक सकारात्मक प्रयास के तौर पर ले और उसी सोच के साथ हमें सुझाव दें और हमारी खुलकर आलोचना भी करें. 
धन्यवाद. 
दिनेश श्रीनेत 
संपादक, दैट्स हिन्दी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दैट्स हिन्दी के बारे में आपकी टिप्पणी पढ़ी, आपके सुझावों और आलोचनाओं का स्वागत है. मगर आपने जो उधार के कंटेट की बात लिखी है, वह महज एक भ्रम है. हम अपनी साइट पर दो न्यूज एजेंसियों तथा कुछ एंटरटेनमेंट एजेंसी तथा मुंबई स्थित हमारे कुछ विशेष संवाददाताओं की खबरें ही लेते हैं. साइट के शुरूआती दौर में भ्रमवश हमारी टीम में से किसी ने गूगल न्यूज की फीड से खबरें उठा लीं, बिना यह ध्यान दिए कि यह विशिष्ट साइट से जुडी है, (जैसा कि आप जानते हैं प्रिंट मीडिया में गूगल का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है.) दूसरी बात यह वन इंडिया का बदला संस्करण नहीं है बल्कि वन इंडिया के भाषाई संस्करणों की श्रृंखला के तहत इस शुरू किया गया है. दैट्स हिन्दी अभी अपना स्वरूप ग्रहण कर रही है, हम चाहते हैं कि नेट पर हिन्दी से जुड़े लोग इसे एक सकारात्मक प्रयास के तौर पर ले और उसी सोच के साथ हमें सुझाव दें और हमारी खुलकर आलोचना भी करें.<br />
धन्यवाद.<br />
दिनेश श्रीनेत<br />
संपादक, दैट्स हिन्दी</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Gulshan Kumar</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6969</link>
		<dc:creator>Gulshan Kumar</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 15:08:53 +0000</pubDate>
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		<description>ey ek essa manch he jaha har koi apne dil ki baat kah sakta he baki rahi hindi ka bhala hone ki baat to bhul jao mujhe to hindi par pehle se jiada khatra mehsus hota he</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ey ek essa manch he jaha har koi apne dil ki baat kah sakta he baki rahi hindi ka bhala hone ki baat to bhul jao mujhe to hindi par pehle se jiada khatra mehsus hota he</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: रवि</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/280#comment-6965</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Nov 2007 11:40:44 +0000</pubDate>
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		<description>हे हे... हिन्दी ओनली पोर्टल मे मराठी का चिट्ठा भी शामिल है. देवनागरी मसाला एकत्र करने वाला इनका बॉट मराठी नेपाली सबको एकत्र कर एक साथ रख रहा है... :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हे हे&#8230; हिन्दी ओनली पोर्टल मे मराठी का चिट्ठा भी शामिल है. देवनागरी मसाला एकत्र करने वाला इनका बॉट मराठी नेपाली सबको एकत्र कर एक साथ रख रहा है&#8230; <img src='http://nuktachini.debashish.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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