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	<title>Comments on: कौन बनेगा श्रेष्ठ एग्रीगेटर?</title>
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	<description>निंदक नीयर राखिये</description>
	<pubDate>Mon, 12 May 2008 08:11:51 +0000</pubDate>
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		<title>By: अजित वडनेरकर</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7253</link>
		<dc:creator>अजित वडनेरकर</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jan 2008 20:50:00 +0000</pubDate>
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		<description>कुछ समझे , कुछ नहीं समझे । हम हैं तकनीकी अज्ञानी । देबूभाई इसे अच्छी तरह जानते हैं। 
देबूभाई के संतुलित और समझदारी भरे लेखन को सराहते हैं हम।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कुछ समझे , कुछ नहीं समझे । हम हैं तकनीकी अज्ञानी । देबूभाई इसे अच्छी तरह जानते हैं।<br />
देबूभाई के संतुलित और समझदारी भरे लेखन को सराहते हैं हम।</p>
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		<title>By: सृजन शिल्पी</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7230</link>
		<dc:creator>सृजन शिल्पी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Jan 2008 15:21:04 +0000</pubDate>
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		<description>मेरी उपर्युक्त टिप्पणी में "बीबीसी हिन्दी और वेबदुनिया की साइट पर इस तरह की सुविधा पहले से है"  के संदर्भ में यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि उन साइटों में अलग-अलग पाठकों की अभिरुचि का ट्रैक रखते हुए लेख प्रस्तुत नहीं किये जाते। लेकिन जिस विषय पर आप कोई लेख पढ़ रहे हों, उनसे संबंधित अन्य लेखों के लिंक भी स्वत: उसी पृष्ठ पर आ जाते हैं। पाठकों के लिए यह एक बड़ी सुविधा है, पूरे मामले को समझने के लिए, पिछले संदर्भों से परिचित होने के लिए, किसी परिघटना के विकास-क्रम को जानने के लिए। 

क्या एग्रीगेटर यह कर सकते हैं कि किसी विषय विशेष से संबंधित विभिन्न ब्लॉगों पर आई सभी प्रविष्टियों को प्रासंगिकता और उनके प्रकाशन की तारीख के क्रम में प्रस्तुत कर सकें?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरी उपर्युक्त टिप्पणी में &#8220;बीबीसी हिन्दी और वेबदुनिया की साइट पर इस तरह की सुविधा पहले से है&#8221;  के संदर्भ में यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि उन साइटों में अलग-अलग पाठकों की अभिरुचि का ट्रैक रखते हुए लेख प्रस्तुत नहीं किये जाते। लेकिन जिस विषय पर आप कोई लेख पढ़ रहे हों, उनसे संबंधित अन्य लेखों के लिंक भी स्वत: उसी पृष्ठ पर आ जाते हैं। पाठकों के लिए यह एक बड़ी सुविधा है, पूरे मामले को समझने के लिए, पिछले संदर्भों से परिचित होने के लिए, किसी परिघटना के विकास-क्रम को जानने के लिए। </p>
<p>क्या एग्रीगेटर यह कर सकते हैं कि किसी विषय विशेष से संबंधित विभिन्न ब्लॉगों पर आई सभी प्रविष्टियों को प्रासंगिकता और उनके प्रकाशन की तारीख के क्रम में प्रस्तुत कर सकें?</p>
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		<title>By: अजय कुमार जैन</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7229</link>
		<dc:creator>अजय कुमार जैन</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Jan 2008 15:19:38 +0000</pubDate>
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		<description>अभिव्यक्ति की आजादी सभी को है, अब ये बात किसी को अच्छी ना लगे तो कम से कम दुसरो के लिखे पर (जो कि निस्वार्थ भाव से परसेवाहिताय लिखा गया हो), विवाद खडा करना उचित नही है! एवं विशेषकर अगर लेख तकनीकी  हो तो तकनीक पर आधारित खामियॉ निकालें ना कि शब्दों पर आधारित  विवाद।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अभिव्यक्ति की आजादी सभी को है, अब ये बात किसी को अच्छी ना लगे तो कम से कम दुसरो के लिखे पर (जो कि निस्वार्थ भाव से परसेवाहिताय लिखा गया हो), विवाद खडा करना उचित नही है! एवं विशेषकर अगर लेख तकनीकी  हो तो तकनीक पर आधारित खामियॉ निकालें ना कि शब्दों पर आधारित  विवाद।</p>
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		<title>By: सृजन शिल्पी</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7225</link>
		<dc:creator>सृजन शिल्पी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Jan 2008 10:09:12 +0000</pubDate>
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		<description>चिट्ठों की भीड़ में पठनीय पोस्ट का चयन करने में एग्रीगेटर तकनीकों के माध्यम से जिस हद तक पाठकों की मदद कर सके, सराहनीय और स्वागतयोग्य है। 

यदि कोई एग्रीगेटर अलग-अलग पाठकों की अभिरुचि का ट्रैक रखते हुए स्वचालित तरीके से संबंधित विषय पर उपलब्ध प्रविष्टियों को एक साथ प्रस्तुत कर सके, तो सोने में सुगंध जैसी बात होगी। बीबीसी हिन्दी और वेबदुनिया की साइट पर इस तरह की सुविधा पहले से है।  

एग्रीगेटरों की तकनीक में बेहतरी के बारे में आपके दूरदर्शी सुझावों पर अमल करने की पहल करने वाला एग्रीगेटर ही श्रेष्ठ एग्रीगेटर सिद्ध होगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>चिट्ठों की भीड़ में पठनीय पोस्ट का चयन करने में एग्रीगेटर तकनीकों के माध्यम से जिस हद तक पाठकों की मदद कर सके, सराहनीय और स्वागतयोग्य है। </p>
<p>यदि कोई एग्रीगेटर अलग-अलग पाठकों की अभिरुचि का ट्रैक रखते हुए स्वचालित तरीके से संबंधित विषय पर उपलब्ध प्रविष्टियों को एक साथ प्रस्तुत कर सके, तो सोने में सुगंध जैसी बात होगी। बीबीसी हिन्दी और वेबदुनिया की साइट पर इस तरह की सुविधा पहले से है।  </p>
<p>एग्रीगेटरों की तकनीक में बेहतरी के बारे में आपके दूरदर्शी सुझावों पर अमल करने की पहल करने वाला एग्रीगेटर ही श्रेष्ठ एग्रीगेटर सिद्ध होगा।</p>
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		<title>By: Debashish</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7219</link>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jan 2008 19:08:24 +0000</pubDate>
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		<description>पढ़ने के लिये सभी का शुक्रिया!

&lt;b&gt;रचनाः&lt;/b&gt; आपकी टिप्पणी मेरे स्पैम फिल्टर में फंसी रह गई जिसे आज निकाला है। आपकी पूरी टिप्पणी प्रकाशित करने का मेरा कोई उद्देश्य नहीं था, अपने ही ब्लॉग पर क्या और कितना लिखना या उद्धत करना है इतनी छूट तो मुझे दें। आपकी बात को तोड़ा मरोड़ा नहीं गया इतना आपने पाया होगा। 

मुझे लगता है आपको इंटरनेट तकनीक पर और ज्ञान हासिल करना चाहिये ताकि रवि के सुझाव को obselete और 80 के दशक की बुकमार्किंग तकनीक को modern समझने की गलतफहमी दूर हो। 

बता दूं कि मैं किसी भी गुट में शामिल नहीं हूँ और ना ही गैर तकनीकी व तकनीकविद्द, या नये पुराने या लेफ्ट या राईटविंग वाले खेमेवाद में पड़ता हूँ। यहाँ भी उद्देश्य एक तकनीकी सुझाव देने का था, सो किया। मैं 2002 से ब्लॉगिंग में हूँ रचना और जितने अंग्रेज़ी चिट्ठे पढ़ता रहा हूँ उतने तो हिन्दी में कुल जमा अच्छे चिट्ठे तक नहीं हैं। तो मैं थका नहीं हूँ, पर मैं समझदारी से पढ़ने में भी यकीन रखता हूँ, और इसी तरह के सोच वालों ने एग्रीगेटर्स बनाये और इसकी तकनीक में सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं। हर कोई अच्छे चिट्ठे पढ़ना चाहता है और यह उसी काम को तकनीकी रूप से आसान बनाने की चेष्टा है। 

चुंकि आप अधिकाधिक चिट्ठे पढ़ना चाहती हैं तो आपको एग्रीगेटर्स का प्रयोग तो अवश्य सीखना चाहिये। बुकमार्किंग कर, हर ब्लॉग पर जाकर पढ़ना न समझदारी है और न ही efficient। 

&lt;b&gt;प्रभाकरः&lt;/b&gt; मैं तो चिट्ठे का शीर्षक और मजमून देख कर पढ़ता हूँ तो कोई चिट्ठा मेरी रुचि का हो और समय मयस्सर हो तो छूटेगा नहीं। आपका चिट्ठा पढ़ता रहता हूँ। टिप्पणी करने में संकोच होता है पर कभी कभार साहस जुटा लेता हूँ।

&lt;b&gt;संजयः &lt;/b&gt;हर चीज़ में समय के साथ सुधार तो लाना ही चाहिये। चिट्ठाजगत के साथ साथ अन्य एग्रीगेटर्स को भी ये फोकट का सुझाव मैंने दिया यह सोचकर कि वे और उन्नत हों, सिर्फ मीन मेख निकालना तो उद्देश्य नहीं था।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पढ़ने के लिये सभी का शुक्रिया!</p>
<p><b>रचनाः</b> आपकी टिप्पणी मेरे स्पैम फिल्टर में फंसी रह गई जिसे आज निकाला है। आपकी पूरी टिप्पणी प्रकाशित करने का मेरा कोई उद्देश्य नहीं था, अपने ही ब्लॉग पर क्या और कितना लिखना या उद्धत करना है इतनी छूट तो मुझे दें। आपकी बात को तोड़ा मरोड़ा नहीं गया इतना आपने पाया होगा। </p>
<p>मुझे लगता है आपको इंटरनेट तकनीक पर और ज्ञान हासिल करना चाहिये ताकि रवि के सुझाव को obselete और 80 के दशक की बुकमार्किंग तकनीक को modern समझने की गलतफहमी दूर हो। </p>
<p>बता दूं कि मैं किसी भी गुट में शामिल नहीं हूँ और ना ही गैर तकनीकी व तकनीकविद्द, या नये पुराने या लेफ्ट या राईटविंग वाले खेमेवाद में पड़ता हूँ। यहाँ भी उद्देश्य एक तकनीकी सुझाव देने का था, सो किया। मैं 2002 से ब्लॉगिंग में हूँ रचना और जितने अंग्रेज़ी चिट्ठे पढ़ता रहा हूँ उतने तो हिन्दी में कुल जमा अच्छे चिट्ठे तक नहीं हैं। तो मैं थका नहीं हूँ, पर मैं समझदारी से पढ़ने में भी यकीन रखता हूँ, और इसी तरह के सोच वालों ने एग्रीगेटर्स बनाये और इसकी तकनीक में सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं। हर कोई अच्छे चिट्ठे पढ़ना चाहता है और यह उसी काम को तकनीकी रूप से आसान बनाने की चेष्टा है। </p>
<p>चुंकि आप अधिकाधिक चिट्ठे पढ़ना चाहती हैं तो आपको एग्रीगेटर्स का प्रयोग तो अवश्य सीखना चाहिये। बुकमार्किंग कर, हर ब्लॉग पर जाकर पढ़ना न समझदारी है और न ही efficient। </p>
<p><b>प्रभाकरः</b> मैं तो चिट्ठे का शीर्षक और मजमून देख कर पढ़ता हूँ तो कोई चिट्ठा मेरी रुचि का हो और समय मयस्सर हो तो छूटेगा नहीं। आपका चिट्ठा पढ़ता रहता हूँ। टिप्पणी करने में संकोच होता है पर कभी कभार साहस जुटा लेता हूँ।</p>
<p><b>संजयः </b>हर चीज़ में समय के साथ सुधार तो लाना ही चाहिये। चिट्ठाजगत के साथ साथ अन्य एग्रीगेटर्स को भी ये फोकट का सुझाव मैंने दिया यह सोचकर कि वे और उन्नत हों, सिर्फ मीन मेख निकालना तो उद्देश्य नहीं था।</p>
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		<title>By: sanjay bengani</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7218</link>
		<dc:creator>sanjay bengani</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jan 2008 05:54:51 +0000</pubDate>
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		<description>सत्य वचन.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सत्य वचन.</p>
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		<title>By: रवि</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7217</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jan 2008 04:55:13 +0000</pubDate>
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		<description>धन्यवाद देबू भाई, आपने मेरे विचारों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया. साथ ही एग्रीगेटरों को भविष्य के लिए रूप धरने में बहुत सी राहें सुझा दीं. उन्हें कंसल्टेंसी फ़ीस देना ही चाहिए. :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>धन्यवाद देबू भाई, आपने मेरे विचारों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया. साथ ही एग्रीगेटरों को भविष्य के लिए रूप धरने में बहुत सी राहें सुझा दीं. उन्हें कंसल्टेंसी फ़ीस देना ही चाहिए. <img src='http://nuktachini.debashish.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
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		<title>By: Prabhakar Pandey</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7216</link>
		<dc:creator>Prabhakar Pandey</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jan 2008 04:20:35 +0000</pubDate>
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		<description>देबूदा, नमस्कार, सही फरमाया आपने पर क्या किसी के भी चिट्ठे को कूड़ा-कबाड़ कहना अच्छा है। और रही बात पढ़ने की तो लोग अपनी रूचिनुसार लेखों का चयन कर पढ़ ही रहे हैं। सच बात है कि सभी लेखों को पढ़ना आसान नहीं है यह सब जानते हैं फिर अपने मनपसंद लेखों और चिट्ठाकारों को ही पढ़ा जाए या लोग पढ़ते ही हैं तो फिर इसके लिए नगाड़ा पीटने की क्या आवश्यकता है। 

लेखक सभी नहीं हो सकते पर ले-खक सभी हो सकते हैं। तो ले-खक को लेखक बनाना चिट्ठाकारिता का उद्देश्य होना चाहिए इसके लिए यह आवश्यक है कि बीच-बीच में किसी चिट्ठाकार के सभी नहीं तो कम से कम पच्चीस प्रतिशत लेखों को पढ़कर उसकी अच्छाई-बुराई से ले-खक को अवगत कराया जाए ताकि वह लेखक की ओर अग्रसर हो सके। किसी भी बड़े-बड़े लेखकों को देखें उनकी बहुत सारी रचनाओं में से कुछ ने ही उन्हे लेखक का दर्जा दिलवाया। देबूदा कम से कम मेरी दस रचनाओं में से एक तो पढ़ लिया कीजिए। अग्रिम धन्यवाद।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>देबूदा, नमस्कार, सही फरमाया आपने पर क्या किसी के भी चिट्ठे को कूड़ा-कबाड़ कहना अच्छा है। और रही बात पढ़ने की तो लोग अपनी रूचिनुसार लेखों का चयन कर पढ़ ही रहे हैं। सच बात है कि सभी लेखों को पढ़ना आसान नहीं है यह सब जानते हैं फिर अपने मनपसंद लेखों और चिट्ठाकारों को ही पढ़ा जाए या लोग पढ़ते ही हैं तो फिर इसके लिए नगाड़ा पीटने की क्या आवश्यकता है। </p>
<p>लेखक सभी नहीं हो सकते पर ले-खक सभी हो सकते हैं। तो ले-खक को लेखक बनाना चिट्ठाकारिता का उद्देश्य होना चाहिए इसके लिए यह आवश्यक है कि बीच-बीच में किसी चिट्ठाकार के सभी नहीं तो कम से कम पच्चीस प्रतिशत लेखों को पढ़कर उसकी अच्छाई-बुराई से ले-खक को अवगत कराया जाए ताकि वह लेखक की ओर अग्रसर हो सके। किसी भी बड़े-बड़े लेखकों को देखें उनकी बहुत सारी रचनाओं में से कुछ ने ही उन्हे लेखक का दर्जा दिलवाया। देबूदा कम से कम मेरी दस रचनाओं में से एक तो पढ़ लिया कीजिए। अग्रिम धन्यवाद।</p>
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	<item>
		<title>By: rachna</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7214</link>
		<dc:creator>rachna</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jan 2008 04:09:52 +0000</pubDate>
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		<description>मेरी दूसरी तिपानी को याहं पर ना देकर आप ने केवल मारे विचारो का एक ही पक्ष रखा है दूसरा मे दे रही हूँ: &lt;blockquote&gt;&lt;i&gt;Rachna Singh said... ब्लोग एक पर्सनल डाईरी है इसमे हम जो चाहेए लिख सकते ब्लोग मे ही ये सुविधा है की अपना लिखा किसी से पसंद नहीं करवाना होता है लिखो और तरंगों मे डालदो तरंगे जहाँ चाहेगी ले जयाएगी । बाक़ी इन तरंगों मे इतनी ताकत होती है कि ये अपने अंदर सब समा सकती है । मन के उदगार व्यक्त भी होगये और किसी से कुछ कहना भी नहीं पडा , यही है ब्लोग का असली मतलब । जो समझ लेते हैं वह इसे ऎन्जॉय करते है किसी ने आप को जब तक ईमेल से लिंक नहीं बेह्जा है तबतक उसका ब्लोग अगर आप पढ़ रहें तो आप उसकी "निज " का अवलोकन कर रहें है । किसी के निज पर उंगली उठाना गलत है उसे कुडा कहना गलत है । आप ने ये headline जिस ब्लोग से ली है मे उसको भी पढे चुकी हूँ । तकनीक कि जानकारी के लिये आप सदेव ही हम सब से आगे हैं , इस पर किसे शक है पर ब्लोग का विभाजन प्रेमचंद और गुलशन नंदा के हिसाब नहीं हो सकता। ब्लोग का उपयोग अवश्य साहित्य रचाने के लिये हो सकता है पर ब्लोग व्यक्तिगत अभिव्क्ती का माध्यम है और हम जितना दूसरे कि डाईरी को "समझेगे " उतना मानव भाव और उदगार को अपने अंदर समा सकेगे so read as many as we can without filtering the content 3:27 PM&lt;/i&gt;&lt;/blockquote&gt;
 
तकनीक की जानकारी जो रवि की पोस्ट मे दी गयी है वह बहुत पुरानी है और bilkul obselete है { मेरी नज़र}. पर किसी के लिखे को कचरा कहना उसके निज को अपमानित करना होता है. और इस पोस्ट की headline रवि कि अपनी नहीं है. इसके अलावा जब एक संवाद एक ब्लोग पर chal रहा है तो उस पर नयी पोस्ट बनाना आप वरिश्द ब्लोग्गेर्स की परिपाटी है लकिन जब कोई नया ब्लॉगर ऐसा करता है तो आप सब इसे गलत सिद्ध करते है और किस्सी भी कमेन्ट का उलेख करने से पहले अगर आप दोनो पक्षों को निष्पक्ष द्रष्टी से देखते तो सही होता। ब्लोग पर गुट बंदी करना सही नहीं है।  

&lt;blockquote&gt;&lt;i&gt;"इस बात से आँखें मूंद लेने से क्या यह असत्य हो जायेगा कि हिन्दी ब्लॉगों को पढ़ना क्रमशः दुश्कर होता जा रहा है?"&lt;/i&gt;&lt;/blockquote&gt;बस आप अभी से थक गये !!!!!!!!!!!! अभी तो Hindi ब्लोग्गिंग की शैशव अवस्था है। मेरा विचार है आप अपने ब्राउजर के फवोरितेस मे अपनी पसंद के ब्लोग सेव कर ले जो आप के अपने हो, बाक़ी को हम सब "रचना, आप भले इस पोस्ट को नये पुराने ब्लॉगर के घिसे पिटे तर्क में घसीट कर अपनी बात कह रही हैं " घिसे पिटे तर्क वाले लोगे के लिये रहने दे ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरी दूसरी तिपानी को याहं पर ना देकर आप ने केवल मारे विचारो का एक ही पक्ष रखा है दूसरा मे दे रही हूँ:<br />
<blockquote><i>Rachna Singh said&#8230; ब्लोग एक पर्सनल डाईरी है इसमे हम जो चाहेए लिख सकते ब्लोग मे ही ये सुविधा है की अपना लिखा किसी से पसंद नहीं करवाना होता है लिखो और तरंगों मे डालदो तरंगे जहाँ चाहेगी ले जयाएगी । बाक़ी इन तरंगों मे इतनी ताकत होती है कि ये अपने अंदर सब समा सकती है । मन के उदगार व्यक्त भी होगये और किसी से कुछ कहना भी नहीं पडा , यही है ब्लोग का असली मतलब । जो समझ लेते हैं वह इसे ऎन्जॉय करते है किसी ने आप को जब तक ईमेल से लिंक नहीं बेह्जा है तबतक उसका ब्लोग अगर आप पढ़ रहें तो आप उसकी &#8220;निज &#8221; का अवलोकन कर रहें है । किसी के निज पर उंगली उठाना गलत है उसे कुडा कहना गलत है । आप ने ये headline जिस ब्लोग से ली है मे उसको भी पढे चुकी हूँ । तकनीक कि जानकारी के लिये आप सदेव ही हम सब से आगे हैं , इस पर किसे शक है पर ब्लोग का विभाजन प्रेमचंद और गुलशन नंदा के हिसाब नहीं हो सकता। ब्लोग का उपयोग अवश्य साहित्य रचाने के लिये हो सकता है पर ब्लोग व्यक्तिगत अभिव्क्ती का माध्यम है और हम जितना दूसरे कि डाईरी को &#8220;समझेगे &#8221; उतना मानव भाव और उदगार को अपने अंदर समा सकेगे so read as many as we can without filtering the content 3:27 PM</i></p></blockquote>
<p>तकनीक की जानकारी जो रवि की पोस्ट मे दी गयी है वह बहुत पुरानी है और bilkul obselete है { मेरी नज़र}. पर किसी के लिखे को कचरा कहना उसके निज को अपमानित करना होता है. और इस पोस्ट की headline रवि कि अपनी नहीं है. इसके अलावा जब एक संवाद एक ब्लोग पर chal रहा है तो उस पर नयी पोस्ट बनाना आप वरिश्द ब्लोग्गेर्स की परिपाटी है लकिन जब कोई नया ब्लॉगर ऐसा करता है तो आप सब इसे गलत सिद्ध करते है और किस्सी भी कमेन्ट का उलेख करने से पहले अगर आप दोनो पक्षों को निष्पक्ष द्रष्टी से देखते तो सही होता। ब्लोग पर गुट बंदी करना सही नहीं है।  </p>
<blockquote><p><i>&#8220;इस बात से आँखें मूंद लेने से क्या यह असत्य हो जायेगा कि हिन्दी ब्लॉगों को पढ़ना क्रमशः दुश्कर होता जा रहा है?&#8221;</i></p></blockquote>
<p>बस आप अभी से थक गये !!!!!!!!!!!! अभी तो Hindi ब्लोग्गिंग की शैशव अवस्था है। मेरा विचार है आप अपने ब्राउजर के फवोरितेस मे अपनी पसंद के ब्लोग सेव कर ले जो आप के अपने हो, बाक़ी को हम सब &#8220;रचना, आप भले इस पोस्ट को नये पुराने ब्लॉगर के घिसे पिटे तर्क में घसीट कर अपनी बात कह रही हैं &#8221; घिसे पिटे तर्क वाले लोगे के लिये रहने दे ।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: sanjay</title>
		<link>http://nuktachini.debashish.com/290#comment-7213</link>
		<dc:creator>sanjay</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jan 2008 01:11:03 +0000</pubDate>
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		<description>मेरे ख्‍याल से यह भ्रमित बहस है.  सारी दुनिया में किताबों के करोड़ों प्रकाशन होते हैं जो हर तरह के विषयों पर लिखी जाती हैं. क्‍या हमें सबके बारे में जानना होता है? नहीं.  लेकिन किताबें पढ़ीं भी जाती हैं, खरीदी भी जाती हैं.  चिट्ठों के संकलक से आखिर क्‍या अपेक्षा की जा रही है? क्‍या लोग उनसे अपनी जगह चिट्ठे पढ़ने का काम भी कराना चाहते हैं? तकनीक के झमेले में जबरन चिट्ठों को बहस का अखाड़ा बनाया जा रहा है. चिट्ठाजगत का क्‍लासिफिकेशन एक प्रयोग है. चल जाए तो और सुधार होंगे. लेकिन इससे किसी को क्‍या नुकसान है मैं नहीं समझ पा रहा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे ख्‍याल से यह भ्रमित बहस है.  सारी दुनिया में किताबों के करोड़ों प्रकाशन होते हैं जो हर तरह के विषयों पर लिखी जाती हैं. क्‍या हमें सबके बारे में जानना होता है? नहीं.  लेकिन किताबें पढ़ीं भी जाती हैं, खरीदी भी जाती हैं.  चिट्ठों के संकलक से आखिर क्‍या अपेक्षा की जा रही है? क्‍या लोग उनसे अपनी जगह चिट्ठे पढ़ने का काम भी कराना चाहते हैं? तकनीक के झमेले में जबरन चिट्ठों को बहस का अखाड़ा बनाया जा रहा है. चिट्ठाजगत का क्‍लासिफिकेशन एक प्रयोग है. चल जाए तो और सुधार होंगे. लेकिन इससे किसी को क्‍या नुकसान है मैं नहीं समझ पा रहा.</p>
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