नुक्ताचीनी



Archive for the ‘ज़िंदगी आनलाईन’ Category

देखिये कौन रहा है गूगल अनुवादक का प्रयोग

By Debashish • Jul 4th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन

भले मैं और आप और खास तौर पर भाषा शुद्धतावादी फिलहाल गूगल अनुवादक में नई जोड़ी गई हिन्दी अनुवाद की सेवा का फिलहाल प्रयोग न कर रहे हों पर लगता है स्पैमरों ने ज़रूर इसका इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है।



आग पर बैठे शहर

By Debashish • May 19th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, ताज़ातरीन पोस्ट

तहलका हिन्दी पत्रिका में झरिया की कोयला खदानों के गिर्द भूमिगत आग के बारे में रोचक खोजपरक लेख छपा है। निरंतर पत्रिका में अतुल अरोरा और मैंने आज से दो साल पहले इसी विषय पर एक और खोजपरक लेख लिखा था, एक दहकते शहर की दास्तान।



अंतर्जाल पर मानसिक विकृति की कमी नहीं

By Debashish • May 17th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन

कुछ दिनों पहले ग्लोबल वॉयसेज़ हिन्दी के लिये मैंने एक पोस्ट का अनुवाद किया था। यह पोस्ट मालदीव में paedophiles यानि बाल यौन शोषकों के बढ़ते क्रिया कलाप पर केंद्रित थी। पर इस पोस्ट से किसी मानसिक रूप से विकृत व्यक्ति की काम विकृति पूरी हो रही होगी इसका अंदाज़ा तो शायद कोई भी नहीं लगा सकता।



निरंतर पत्रिका की कुछ बातें

By Debashish • Mar 28th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, ताज़ातरीन पोस्ट

पाठकों, आपको स्मरण होगा कि निरंतर के पुराने अंक अक्षरग्राम स्थित हमारे पूर्व सर्वर से नष्ट हो गये थे। ये अंक द्रुपल आधारित सिविकस्पेस पर बने थे। दुर्भाग्यवश इन अंकों का हमारे पास बैकअप नहीं था। अंक 7 के उपरांत हम निरंतर के अपने नये सर्वर और जूमला प्रकाशन प्रणाली पर स्थानांतरित हो गये थे। [...]



अपने चिट्ठे से जार्ज बुश का चित्र कैसे हटायें

By Debashish • Mar 25th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन

आपका ध्यान एक समस्या की तरफ दिलाना आकर्षित करना चाहता हूँ।
http://www.hindiblogs.org की और इंगित करते हुये कई चिट्ठाकारों ने एक जावास्क्रिप्ट अपनी साईट पर रखी है जिससे एक चित्र दिखता है “हिन्दी ब्लॉग्स पर इस चिट्ठे की समीक्षा”। इंटरनेट जिंदाबाद का नारा लगाते हुये मैंने यह ईमेज माईजावासर्वर नामक एक मुफ्त के होस्ट पर रखी [...]