नुक्ताचीनी


दोस्ती की रिश्वत

By Debashish • Mar 5th, 2004 • Category: किस्से कुर्सी के

जिह्वा ने हसीब के एक हास्यास्पद लेख की चर्चा इस चिट्ठे में की है। हसीब का मानना है कि अगर कश्मीर जीतना है तो भारत को पाकिस्तान से आगामी क्रिकेट श्रृंखला हार जाना चाहिए। हैरत होती है कि कलमकार कागज पर कश्मीर जैसी समस्या का किस तेजी से हल निकाल लेते हैं। तरस भी आता है। लेखक की राय काफी हद तक भाजपा की चुनावी रणनीति से मेल खाती है। भाजपा का भी यही मानना है कि सुखद अर्थव्यवस्था का मंत्र पढ़कर और भारत‍ पाक दोस्ती की लॉलीपॉप पकड़ाकर जनता को बरगलाया जा सकता है। उन्हें ये लगता है कि भारत में बसे तमाम मुसलमानों का दिल पाकिस्तान में बसता है तो पाक से अच्छे संबंध बनाने का कटोरा हाथ में थामने पर अल्पसंख्यक वोट खुद ब खुद झोली में आ गिरेंगे। जावेद अख्तर और अन्य जागरूक मुसलमान बुद्धीजीवियों ने हिंदुस्तान टाईम्स को लिखे एक पत्र में लिखा है:

शर्म कि बात है कि वाजपेयी और आडवाणी दोनों ये सोचते हैं कि भारत पाक दोस्ती की रिश्वत देकर वे मुस्लिम वोट हासिल कर लेंगे।

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