नुक्ताचीनी ~ Hindi Blog


Archive for the ‘अतिथि का चिट्ठा’ Category

तकनीकी विषयों को विशेष महत्व मिलेः सुनील

By • Jul 31st, 2006 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, अतिथि का चिट्ठा

निरंतर काउंटडाउन भाग 6 देबाशीष ने मुझसे पूछा कि मैं निरंतर का किस तरह का हिस्सा बनना चाहूँगा, इसका उत्तर तो केवल यही हो सकता है कि मैं सबसे अच्छा हिस्सा होना चाहूँगा। लेकिन शायद अच्छा हिस्सा होने के लिए, काम कुछ अधिक करना पड़ सकता है, इसलिए अगर सबसे बढ़िया हिस्सा न भी बन […]



निरंतर में पाठकों की पूरी हिस्सेदारी हो: प्रत्यक्षा

By • Jul 28th, 2006 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, अतिथि का चिट्ठा

निरंतर काउंटडाउन भाग ५ जब चिट्ठाकारी शुरु की लगभग उसी समय निरंतर से भी परिचय हुआ। पहली बार पढकर बहुत आनंद आया। इसलिये कि एक तो पढने का कुछ और मसाला मिला और दूसरे इसलिये कि ये पत्रिका कुछ अलग किस्म की लगी थी। अन्य जाल पत्रिकाओं से अलग इस मायने में थी कि कहानी […]



‘निरंतर’ हिंदी चिट्ठाकारों के सरोकार की आवाज़: ईस्वामी

By • Jul 27th, 2006 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, अतिथि का चिट्ठा

निरंतर काउंटडाउन भाग 4 निरंतर को इसके प्रारंभ से ही लेखन और प्रकाशन की एकाधिक विधाओं की वर्णसंकरी (हाईब्रीड) के रूप मे देखता रहा हूँ। इन्टरनेट पर होते हुए भी माह में एक ही बार ‘टपकती’ निरंतर इलेक्टॉनिक माध्यम वाली द्रुत अविरलता से नहीं बहती। वहीं हर अंक के प्रकाशन से ही द्वीदिशी संवाद के […]



मेहमान का चिट्ठाः नितिन

By • Dec 21st, 2004 • Category: आसपास, अतिथि का चिट्ठा

नुक्ताचीनी ने मेज़बानी की तीसरी अनुगूँज की, और विषय ऐसा था जिस पर एक अंग्रेज़ी ब्लॉगर लगातार लिखते रहे हैं, “द एकार्न” के रचनाकार, सिंगापुर में बसे, नितिन पई। पेशे से दूरसंचार इंजीनियर नितिन एक प्रखर व मौलिक चिट्ठाकार हैं। अपने चिट्ठे में वे दक्षिण‍ एशियाई राजनैतिक और आर्थिक परिदृश्य पर खरी खरी लिखतें हैं, […]