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कोउ नृप होउ

हम सोचते हैं कि भ्रष्टाचार की जड़ नेता और राजनीति है इसके उलट दरअसल जड़ हमारे नौकरशाह ही हैं। कर्नाटक में २००८ से २०१३ तक भाजपा सरकार थी और उसके बाद से काँग्रेस। इस सरकारी चोलाबदली से जमीनी हकीकत पर कोई फर्क नहीं पड़ा, सरकारें बदलती हैं पर नौकरशाह तो नहीं बदलते। कोउ नृप होउ।


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अटल व्यथा»  Comments Off on अटल व्यथा

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दूरदर्शन पर “गोदान” पर आधारित गुलज़ार की टेलिफिल्म आ रही है। पंकज कपूर के किरदार का मृत्यु द्श्य है। श्रीमतीजी, पुत्र और मैं सभी देख रहे हैं। पर अविरल अश्रु बह रहे हैं मेरी आँखों से। जी नहीं, बंद कमरे में भला आंखों में किरकिरी कैसी? यह कोई नयी बात नहीँ है। टी.वी. हो या […]

अभिव्यक्तिः एक नया हिंदी चिट्ठा»  Comments Off on अभिव्यक्तिः एक नया हिंदी चिट्ठा

शैल का हिंदी चिट्ठा अभिव्यक्ति इस श्रृंखला में एक और कड़ी है। लख लख बधाईयाँ शैल! हिंदी चिट्ठों की जमात में आपका स्वागत है।

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पुरस्कार पखवाड़ा»  Comments Off on पुरस्कार पखवाड़ा

बड़ा अच्छा पखवाड़ा रहा। यूं तो पहले भी कुछ ऐसे ईनामात मिले पर इस बार काफी दिनों बाद किस्मत ने साथ दिया लगता है। पहले तो प्राप्त हुआ भाषाईंडिया की ओर से माईक्रोसॉफ्ट वायरलेस कीबोर्ड और माउस (कहना पड़ेगा कि बहुत ही शानदार चीज है, हालांकि नामुराद कुरियर वालों ने 4 बैटरियां रास्ते में ही […]