डॉ. नार्लीकर केवल समीकरणों और ब्रह्मांडीय सिद्धांतों के वैज्ञानिक नहीं थे। वे उस पीढ़ी के प्रतीक थे, जिन्होंने विज्ञान को सामान्य जनमानस से जोड़ा।
भारत में अर्थव्यवस्था का स्वरूप जिस तेजी से बदल रहा है, उसमें अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है।
क्या भारत के लिए कार-मुक्त भविष्य एक कल्पना है? यह लेख बेहतर सार्वजनिक परिवहन और बुनियादी ढांचे में बदलाव की आवश्यकता के मुद्दों पर चर्चा करती है।
हम अपने खून पसीने की कमाई सरकार पर भरोसा कर उनके पास जमा रखते हैं ताकि हमारे जीवन की संध्या बेफिक्र बीते पर ये राशि ज़रूरत पड़ने पर हमें मिले ही नहीं तो क्या होगा? फालतू कारणों से दावों को खारिज होना चिंताजनक है।
हम सोचते हैं कि भ्रष्टाचार की जड़ नेता और राजनीति है, इसके उलट दरअसल जड़ हमारे नौकरशाह हैं। सरकारें बदलती हैं पर नौकरशाह नहीं बदलते।
फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग हाल ही में भारत आये थे। कयास लगे भारतियों में बेतहाशा लोकप्रिय आर्कुट से इसी धरती पर दो दो हाथ करने का इरादा बना है। पर सारे कयासों के बीच असलियत कुछ और ही निकली। जानने के लिये पढ़िये पूरी पोस्ट।
ऐसी ख़बर से इंडिया का क्या फायदा होगा दोस्त? कुछ क्वालिटी काम करो भाई. इंजीनियर्स, डॉक्टर्स, स्टूडेंट्स, किसान, सैनिक, मंत्री क्या कर रहे हैं बताओ. इंडिया सुपर पावर कैसे बनेगा यह बताओ. हीरो – हीरोइन की ख़बर से आगे नही बढ़ेगा देश. जोश-18 पर एक फालतू फिल्मी खबर पर उरुगुये के एक पाठक सुनील की […]
विदेश में बच्चे जिस तरह बड़े होते हैं ये नज़दीक से देखा तो मन थोड़ा खट्टा हुआ। बच्चा मचल रहा है कि माँ या पिता गोद में ले ले, सीने के नज़दीक रखे पर वो तो बैठा है बच्चागाड़ी में, मुँह में चुसना जैसे उसका मुंह बंद करने के लिये ही है। बच्चे का हाथ […]
रोज़ आफिस जाते समय एक नथूने फुलाये सींगधारी से मुलाकात होती है। इसके आसपास पर्यटकों का ताँता लगा रहता है, लोग इसके पीठ पर बैठ, सींगों पर झूल या पूँछ के पास खड़े होकर चित्र खिंचवाते हैं। ये काँसे की बनी साढ़े तीन टन की एक प्रतिमा है जो लोअर मैनहटन में बोलिंग ग्रीन पार्क […]
सतना के यादव जी तो चल लेते हैं। पर ये महाशय ज्यादा अच्छा चल लेते हैं 🙂
न्यूयार्क में हर साल भारत के स्वतंत्रता दिवस यानि 15 अगस्त के पश्चात पहले सप्ताहांत में भारत दिवस मनाया जाता है जिसके अंतर्गत होती एक विशाल परेड और सांध्यकालीन रंगारंग कार्यक्रम। परेड मेडीसन एवेन्यू पर 23 से 41 स्ट्रीट के बीच होती है। आज दोपहर बाद बूंदाबांदी का पूर्वानुमान लगाया गया था पर हल्की बारिश […]
छायाः अक्षय महाजन एक बात कहूं?बचपन के दिन अच्छे थे।कान उमेठे जाने पर दर्द तो होता थापर वो शरारतों में नहीं उतरता था।कान तो अब भी उमेठे जाते हैंपर दर्द ज़रा नहीं होता।अब शरारत करने से जी घबराता है। एक बात कहूं?बचपन के दिन अच्छे थे।लड़ते थे, रोते थे, रुलाते भी थेऔर कुट्टी की उम्र […]
अमरीका आने के बाद भारतियों को सबसे अधिक तकलीफ किस चीज़ से होती होगी? मेरा तजुर्बा है, उस चीज से जिस के प्रयोग के बाद हम बिना धोये रह नहीं पाते। अरे भैया वही जिसे साफ रखने के लिये ये फिरंगी काग़ज से काम चला लेते हैं। सरजी मैं हाथों की बात नहीं कर रहा! […]
अगर आपने ध्यान दिया हो तो विगत दो हफ्तों (शायद उससे भी पहले) से विभिन्न चैनलों पर एक सरकारी विज्ञापन दिखाया जा रहा है। एक चिकन पपेट के द्वारा मुर्गियों की सहसा मौत या बीमार मुर्गियों की जानकारी देने का अनुरोध किया जा रहा है। मुझे तभी खटका था कि अखबारों में तो इस तरह […]
कोला में पेस्टीसाईड की उपस्थिति पर बोतल में तूफान कई बार उठे हैं। कोला निर्माता और दोषारोपण करने वाली सी.एस.ई दोनों पर ही संदेह किया जा रहा है। निरंतर के नये अंक में अफ़लातून और अर्जुन स्वरूप की इसी विषय पर एक बहस प्रकाशित हुई। उनके विचारों को पढ़ते समय यह सोचा था कि अपने […]