नुक्ताचीनी ~ Hindi Blog


Archive for the ‘ज़िंदगी आनलाईन’ Category

ज़रा फिर से कहना

By Debashish • Sep 10th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, ताज़ातरीन पोस्ट

”क्रोम” का बीटा संस्करण कम्प्यूटर व्यावसाय जगत में माइक्रोसॉफ्ट के प्रभुत्व में इज़ाफ़ा करेगा।
गूगल के नये ब्राउज़र क्रोम पर बीबीसी हिन्दी की विशेष टिप्पणी। जी दुरस्त फ़रमाया! इससे अच्छा तो मैं जर्मन भाषा में लिखे ब्लॉग को हिन्दी में पढ़ लूं। सुंदर, मैं अनदेखी चिकनी
पुनश्चः अनुनाद ने ध्यान दिलाया। लगता है बीबीसी [...]



देखिये कौन कर रहा है गूगल अनुवादक का प्रयोग

By Debashish • Jul 4th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन

भले मैं और आप और खास तौर पर भाषा शुद्धतावादी फिलहाल गूगल अनुवादक में नई जोड़ी गई हिन्दी अनुवाद की सेवा का फिलहाल प्रयोग न कर रहे हों पर लगता है स्पैमरों ने ज़रूर इसका इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है।



आग पर बैठे शहर

By Debashish • May 19th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, ताज़ातरीन पोस्ट

तहलका हिन्दी पत्रिका में झरिया की कोयला खदानों के गिर्द भूमिगत आग के बारे में रोचक खोजपरक लेख छपा है। निरंतर पत्रिका में अतुल अरोरा और मैंने आज से दो साल पहले इसी विषय पर एक और खोजपरक लेख लिखा था, एक दहकते शहर की दास्तान।



अंतर्जाल पर मानसिक विकृति की कमी नहीं

By Debashish • May 17th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन

कुछ दिनों पहले ग्लोबल वॉयसेज़ हिन्दी के लिये मैंने एक पोस्ट का अनुवाद किया था। यह पोस्ट मालदीव में paedophiles यानि बाल यौन शोषकों के बढ़ते क्रिया कलाप पर केंद्रित थी। पर इस पोस्ट से किसी मानसिक रूप से विकृत व्यक्ति की काम विकृति पूरी हो रही होगी इसका अंदाज़ा तो शायद कोई भी नहीं लगा सकता।



निरंतर पत्रिका की कुछ बातें

By Debashish • Mar 28th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, ताज़ातरीन पोस्ट

पाठकों, आपको स्मरण होगा कि निरंतर के पुराने अंक अक्षरग्राम स्थित हमारे पूर्व सर्वर से नष्ट हो गये थे। ये अंक द्रुपल आधारित सिविकस्पेस पर बने थे। दुर्भाग्यवश इन अंकों का हमारे पास बैकअप नहीं था। अंक 7 के उपरांत हम निरंतर के अपने नये सर्वर और जूमला प्रकाशन प्रणाली पर स्थानांतरित हो गये थे। [...]