नुक्ताचीनी



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Archive for the ‘अतिथि का चिट्ठा’ Category

कश्मीर और पाकिस्तानी अंर्तविरोध

By nitin • Mar 9th, 2004 • Category: अतिथि का चिट्ठा, किस्से कुर्सी के

मेहमान का चिट्ठाः नितिन

मेरा यह मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपने भारत-विरोध को छोड़ खुद अपनी राह पर नहीं चलता तब तक उप-महाद्वीप में पूर्ण शांति की आशा नहीं की जा सकती। 1947 के बाद चाहे-अनचाहे पाकिस्तान एक स्वतंत्र राष्टृ बन गया है, यह एक सत्य है। लेकिन स्वतंत्र पाकिस्तान की अपनी स्वतंत्र विचारधारा [...]



बाल मजदूरी और हम

By charukesi • Feb 5th, 2004 • Category: अतिथि का चिट्ठा, आसपास

मेहमान का चिट्ठा: चारू

एक सीधा‍ सादा सवाल करती हुँ, बाल मजदूरी क्या है? ज़रा इस व्यक्तव्य पर नज़र डालें…
विश्व में सबसे ज्यादा बाल मजदूर भारत में हैं, विश्वस्त अनुमानों के अनुसार भारत में बाल मजदुरों की संख्या 6 से 11.5 करोड़ के बीच है। शिवकाशी के पटाखा कारखानों में, बीड़ी और कालीन बनाने वाले, [...]