नुक्ताचीनी



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Archive for the ‘किस्से कुर्सी के’ Category

दोस्ती की रिश्वत

By Debashish • Mar 5th, 2004 • Category: किस्से कुर्सी के

जिह्वा ने हसीब के एक हास्यास्पद लेख की चर्चा इस चिट्ठे में की है। हसीब का मानना है कि अगर कश्मीर जीतना है तो भारत को पाकिस्तान से आगामी क्रिकेट श्रृंखला हार जाना चाहिए। हैरत होती है कि कलमकार कागज पर कश्मीर जैसी समस्या का किस तेजी से हल निकाल लेते हैं। तरस भी आता [...]



बाहुबली बनने चले बुद्धिजीवी

By Debashish • Mar 4th, 2004 • Category: किस्से कुर्सी के

सागरिका घोष मानती हैं कि भाजपा के मन में यह पेच रहा है कि वह बुद्धिजीवियों, कलाकारों और इतिहासकारों का दिल नहीं जीत पाई। सर विदिया को मंच पर ला कर वे इस बात को झुटलाना चाहते हैं। कैसी विडंबना है कि जिस जमात के विचारों को छद्म धर्मनिरपेक्षतावाद या वामपंथी विचारधारा बता कर खारिज [...]



क्या वोट डालना अनिवार्य कर देना चाहिए?

By Debashish • Feb 4th, 2004 • Category: आसपास, किस्से कुर्सी के

आज के दैनिक भास्कर में मनोहर पुरी ने अपने एक लेख* में एक महत्वपूर्ण बिंदू पर चर्चा की है। क्या वोट डालना अनिवार्य कर देना चाहिए? हालांकि लेखक के इस तर्क से मैं कतई सहमत नहीं कि वोट न डालने वालों को सरकार के कलापों पर नुक्ता चीनी का हक नहीं होना चाहिए पर हाँ [...]



प्रतिक्रिया पर एक प्रतिक्रिया

By Debashish • Jan 23rd, 2004 • Category: किस्से कुर्सी के

शैल ने मेरे चिठ्ठे “राजनीतिक योग्यता क्या हो” पर प्रतिक्रिया लिखी हैः
बीजेपी को सोनिया से क्या समस्या है ये तो वो ही बता सकते हैं,लेकिन मुझे जो बात खटकती है वो है काँग्रेस की कुनबापरस्ती। आखिर ये लोग नेतृत्व के विचारों का प्रचार करने के बजाय इस बात पर क्यों बल देते रहते हैं कि [...]



राजनीतिक योग्यता क्या हो?

By Debashish • Jan 22nd, 2004 • Category: किस्से कुर्सी के

सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर नया दल बना देने वाले शरद पवार उनसे राजनीतिक गठजोड़ के लिए तैयार हैं। जो मौका परस्ती न करें वो नेता भला क्या नेता! भाजपा भी इस मुद्दे को गरमाने के लिए तैयार है। कुछ ही दिनों पहले अटलजी भारतीय मूल के बॉबी जिंदल के लूसियाना के [...]