नुक्ताचीनी ~ Hindi Blog


Archive for the ‘व्यक्तिगत’ Category

डोमेन ले लो, डोमेन

By • Feb 20th, 2007 • Category: व्यक्तिगत

हिन्दी में डिग जैसी साईट बनाने के उद्देश्य से मैंने ६ ७ माह पहले दो डोमेन बुक कराये थे। पर योजना पर काम करते करते देर हो गई और मेरा मन इसे पर से उब चला है। मैं ये दोनों डोमेन नाम बेचना चाहता हूं, एक है कड़ीघर डॉट कॉम और दूसरा एक डॉट इन […]



पूछिए फुरसत से, फुरसतिया से

By • Jul 26th, 2006 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, व्यक्तिगत

निरंतर काउंटडाउन भाग ३ नामचीन हिंदी अखबार देशबंधु में मंझे साहित्यकार और चिंतक हरिशंकर परसाई का एक कॉलम छपता था “पूछिए परसाई से” जिसमें वे पाठकों के प्रश्नों के उत्तर देते थे। तमाम किस्म के प्रश्न, राजनीति, इतिहास, समकालीन परिदृश्य, साहित्य पर जिनमें कुछ चुटीले सवाल भी शामिल होते थे। निरंतर के पहले अवतार में […]



विज़डम आफ क्राउड्स महज़ किताबी बात नही

By • Jul 25th, 2006 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, व्यक्तिगत

निरंतर काउंटडाउन भाग 2 बिल्कुल यही वजह है कि निरंतर, सिर्फ एक मैगैज़ीन नहीं, ब्लॉगज़ीन है। निरंतर के लेखों में सिर्फ संपादक मंडल की ही नही, इसके लेखकों की ही नही वरन् आपकी राय भी सम्मिलित होनी चाहिए। इसी कड़ी में निरंतर के अगस्त अंक में प्रारंभ किया जा रहा है एक नया स्तंभ “जनमंच“। […]



एक और प्रथमः इंटरैक्टिव कहानी

By • Jul 24th, 2006 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, व्यक्तिगत

निरंतर काउंटडाउन भाग १ निरंतर एक अभिनव प्रयोग रहा है। यह पहली ऐसी पत्रिका है जो न केवल गैरपेशेवर प्रकाशकों द्वारा निकाली जाती है बल्कि पाठकों को प्रकाशित लेखों पर त्वरित टिप्पणी करने का मौका भी देती है। इस तरह ये सिर्फ ज़ीन नहीं, विश्व की प्रथम ब्लॉगज़ीन बन सकी। किसी भी प्रकाशन में पाठकों […]