नुक्ताचीनी


विज़डम आफ क्राउड्स महज़ किताबी बात नही

By Debashish • Jul 25th, 2006 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, व्यक्तिगत

निरंतर काउंटडाउन भाग 2

बिल्कुल यही वजह है कि निरंतर, सिर्फ एक मैगैज़ीन नहीं, ब्लॉगज़ीन है। निरंतर के लेखों में सिर्फ संपादक मंडल की ही नही, इसके लेखकों की ही नही वरन् आपकी राय भी सम्मिलित होनी चाहिए। इसी कड़ी में निरंतर के अगस्त अंक में प्रारंभ किया जा रहा है एक नया स्तंभ “जनमंच“। “जनमंच” के तहत हम पाठकों और लेखकों से जानना चाहेंगे उनकी राय किसी भी खास सामयिक विषय पर और प्रस्तुत करेंगे कलेक्टिव विज़डम यानि सामूहिक विवेक का निचोड़, जो आम राय भले न हो पर पुख्ता राय ज़रूर होगी।

अगस्त अंक के लिये तो पाठकों आप जानते ही होंगे कि विषय है “मेरा भारत कैसा हो?” अगस्त २००६ में हम अपना ६०वाँ स्वाधीनता दिवस मनाने जा रहें हैं सो इससे बेहतर विषय भला और क्या होता! विस्तृत सूचना के लिये पढ़ें अनूप की अक्षरग्राम पर घोषणा। अगर आपने अभी तक अपनी राय न भेजी हो तो आज ही हमारे ईमेल पते patrikaa at gmail dot com पर भेजें।

सामूहिक बुद्धिमत्ता की शक्ति से आपका परिचय होगा जल्द ही आपके नज़दीकी ब्राउज़र पर, जुड़े रहें!

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लेखक: Debashish

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1 टिप्पणी »

  1. दादा आप हमें सोने नहीं देंगे|

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