निरंतर पत्रिका के पुराने अंक नष्ट
By Debashish • May 1st, 2007 • Category: व्यक्तिगतमेरी मूर्खता की वजह से निरंतर पत्रिका के अक्षरग्राम पर रखे पुराने अंक पूर्णतः नष्ट हो चुके हैं और हमारे पास पुराने अंकों का कोई भी बैकअप उपलब्ध नहीं है। ये शायद मेरे जीवन का सबसे दुखदायी दिन है, काश टालमटोल करने की बजाय मैं पुराने अंकों के बैकअप पहले ही रख लेता।
यदि आपके पास […]




