नुक्ताचीनी ~ Hindi Blog


Archive for the ‘ज़िंदगी आनलाईन’ Category

अंतर्जाल पर मानसिक विकृति की कमी नहीं

By • May 17th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन

कुछ दिनों पहले ग्लोबल वॉयसेज़ हिन्दी के लिये मैंने एक पोस्ट का अनुवाद किया था। यह पोस्ट मालदीव में paedophiles यानि बाल यौन शोषकों के बढ़ते क्रिया कलाप पर केंद्रित थी। पर इस पोस्ट से किसी मानसिक रूप से विकृत व्यक्ति की काम विकृति पूरी हो रही होगी इसका अंदाज़ा तो शायद कोई भी नहीं लगा सकता।



निरंतर पत्रिका की कुछ बातें

By • Mar 28th, 2008 • Category: ताज़ातरीन पोस्ट, ज़िंदगी आनलाईन

पाठकों, आपको स्मरण होगा कि निरंतर के पुराने अंक अक्षरग्राम स्थित हमारे पूर्व सर्वर से नष्ट हो गये थे। ये अंक द्रुपल आधारित सिविकस्पेस पर बने थे। दुर्भाग्यवश इन अंकों का हमारे पास बैकअप नहीं था। अंक 7 के उपरांत हम निरंतर के अपने नये सर्वर और जूमला प्रकाशन प्रणाली पर स्थानांतरित हो गये थे। […]



अपने चिट्ठे से जार्ज बुश का चित्र कैसे हटायें

By • Mar 25th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन

आपका ध्यान एक समस्या की तरफ दिलाना आकर्षित करना चाहता हूँ। http://www.hindiblogs.org की और इंगित करते हुये कई चिट्ठाकारों ने एक जावास्क्रिप्ट अपनी साईट पर रखी है जिससे एक चित्र दिखता है “हिन्दी ब्लॉग्स पर इस चिट्ठे की समीक्षा”। इंटरनेट जिंदाबाद का नारा लगाते हुये मैंने यह ईमेज माईजावासर्वर नामक एक मुफ्त के होस्ट पर […]



चिट्ठों में साँस ले रही है देवभाषा

By • Mar 16th, 2008 • Category: ज़िंदगी आनलाईन

पाठ्य पुस्तकों तक सिमट गई देवों की भाषा संस्कृत को अब जाल पर प्रतिष्ठा दिलाने का बीड़ा अमरीकी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत भारतीय मूल के कुछ छात्रों ने उठाया है। उनका एक वृहत काम है संस्कृत पत्रिका विश्ववाणी जिसमें वे विविध विषयों पर लेख प्रकाशित करते हैं। प्राचीन भारतीय गणित से लेकर विवेकानंद पर आलेख, सुभाषित, […]