डॉ. नार्लीकर केवल समीकरणों और ब्रह्मांडीय सिद्धांतों के वैज्ञानिक नहीं थे। वे उस पीढ़ी के प्रतीक थे, जिन्होंने विज्ञान को सामान्य जनमानस से जोड़ा।
आगे पढ़ेंमुगालते में ऐश है
हम भारतीय तो जन्मजात हिपोक्रिट हैं ही। कथनी और करनी का अंतर न हो तो हमारी पहचान ही विलीन हो जाये। कुछ दिनों पहले जब देह मल्लिका के कॉन्स के पहनावे की बात आयी जिसमें कपड़ा कम और जिस्म ज़्यादा था तो मुझे मल्लिका और ऐश्वर्या कि महत्वाकाक्षांओं में कुछ खास फर्क नहीं नज़र आया। […]
जेनेरिक गोरखधंधा
पुणे में आईटी वालों की भरमार है। शहर भी ऐसा है कि लोग बस जाने की सोचते हैं। शहर भी आखिर कितना समोये, सो गुब्बारे की तरह फैल रहा है। वैसे यहाँ के औंध और बानेर जैसे इलाके लोगों की पहली पसंद हैं, सुविधाओं और कार्यस्थल से नज़दीक होने के कारण। चुंकि दावेदार ज्यादा हैं […]
नैन भये कसौटी
दूरदर्शन पर “गोदान” पर आधारित गुलज़ार की टेलिफिल्म आ रही है। पंकज कपूर के किरदार का मृत्यु द्श्य है। श्रीमतीजी, पुत्र और मैं सभी देख रहे हैं। पर अविरल अश्रु बह रहे हैं मेरी आँखों से। जी नहीं, बंद कमरे में भला आंखों में किरकिरी कैसी? यह कोई नयी बात नहीँ है। टी.वी. हो या […]
अनुगूंज ६: चमत्कार या संयोग?
वैसे तो मैं सर्टिफाईड नास्तिक हूँ पर मेट्रिक्स देखने के बाद से मैं इसकी थ्योरी का कायल भी हो गया। कई दफा जीवन में ऐसा हो जाता है कि इस बात पर यकीन सा होने लगता है कि जीवन मानो कोई कंप्यूटर सिमुलेशन हो। एम.आई.बी के अंतिम हिस्से में मेरे इस विचार से मिलता जुलता […]
पहला ख़ुमार
पहले प्यार की बात चल पड़ी तो मुझे भी पहला प्यार याद आ गया। परिणती तक भले न पहुँचा हो पर मन में किसी कोने में यादों की महक तो बाक़ी है। किस्सा चुंकि नितांत निजी है इसलिए सुना कर बोर नहीं करूँगा। पर यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ उन दिनों लिखा एक गीत। कॉलेज […]
मेहमान का चिट्ठाः नितिन
नुक्ताचीनी ने मेज़बानी की तीसरी अनुगूँज की, और विषय ऐसा था जिस पर एक अंग्रेज़ी ब्लॉगर लगातार लिखते रहे हैं, “द एकार्न” के रचनाकार, सिंगापुर में बसे, नितिन पई। पेशे से दूरसंचार इंजीनियर नितिन एक प्रखर व मौलिक चिट्ठाकार हैं। अपने चिट्ठे में वे दक्षिण एशियाई राजनैतिक और आर्थिक परिदृश्य पर खरी खरी लिखतें हैं, […]
आतंक से मुख्यधारा की राह क्या हो?
पुर्नवास का प्रश्न केवल हथियार डाल चुके आतंकवादियों के लिए ही नहीं वरन् समाज के पूर्वाग्रहों के शिकार अनेक वर्गों के परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक है, चाहे वो परित्यक्त या व्यभिचार से पीड़ित महिलाएँ हों, किन्नर, अपंग, सजा भुगत चुके अपराधी हों, या एड्स जैसी कलंकित बीमारियों के पीड़ित। इन्हें मुख्यधारा में शामिल करने, अपने साथ […]
भारतीय ब्लॉग मेला: ३७वां संस्करण
भारतीय ब्लॉग मेला में आपका स्वागत है। प्रकाशन में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ और बिना लाग लपेट शुरु करता हूँ यह आयोजन: अतुल सी.एन.एन की एक ख़बर, जिसमें अमेरिकी पयर्टकों को युरोप में परेशानी से बचाने वाले कैनेडियन प्रतीक चिन्हों वाले लिबासों के प्रचलन का ज़िक्र था, का हवाला देते हुए पर्यटन के […]
हिन्दी ब्लॉगरोल
मुझे याद आता है कि जितेन्द्र ने संभवतः सबसे पहले यह कहा था कि ब्लॉग जगत से सुर्खियों की तरह वे हिन्दी ब्लॉगरोल जैसा भी कुछ चाहते हैं। मंतव्य यह था कि हर चिट्ठाकार और उनके पाठकों को नए चिट्ठों का पता उसी ब्लॉग से मिल जाए और हर बार टेम्प्लेट से छेड़छाड़ की माथापच्ची […]
भारतीय ब्लॉग मेला: आमंत्रण
हर्ष का विषय है कि भारतीय ब्लॉग मेला पहली बार किसी अन्य भाषा के चिट्ठे पर अवतरित हो रहा है। यह नाम भी बड़ा उपयुक्त है, हालाँकि कंक्रीट के जंगलों में मेले अब होते नहीं पर मेले का नाम ज़ेहन में आते ही मनोरंजन ध्यान आता है, एक ऐसा आयोजन जहाँ विभिन्न विषयों पर लिखने […]
देह पर टिकी संस्कृति
अक्षरग्राम अनुगूँज – पहला आयोजन एक नज़र मायानगरी मुम्बई के एक अखबार कि सुर्खियों पर। सिनेमा के इश्तहार वाले पृष्ट पर मल्लिका अपने आधे उरोज़ और अधोवस्त्र की नुमाईश कर अपनी नई फिल्म का बुलावा दे रही हैं। पृष्ट पर ऐसे दर्जनों विज्ञापन हैं, औरत मर्द के रिश्तों को नए चश्मे से देखा जा रहा […]
वर्ज़न वरण बनाम ईंटरएक्टिव माध्यम
बजाज अपनी एक वाहन श्रेणी के लिए बने टीवी विज्ञापन में रेडियो सम्राट अमीन सायानी की आवाज़ का प्रयोग कर रहा है। दरअसल यह एक ही विज्ञापन है पर इसका प्रर्दशन अदनान सामी के साथिया फ़िल्म के लिए गाए एक चर्चित गीत के प्रारंभिक हिन्दी अंतरे के बाद अन्य भाषाई अंतरों के पृथक कॉम्बीनेशन के रूप […]
चिट्ठा विश्व का नया संस्करण
हिन्दी चिट्ठों के संसार की अनंतर दास्तां प्रस्तुत करने के प्रयास में कुछ सुधार के बाद, चिट्ठा विश्व नए रुप में प्रस्तुत है, जिसमें चिट्ठाकार व चिट्ठा परिचय के स्तंभ जोड़े गए हैं। पद्मजा और नीरव का धन्यवाद करना चाहुँगा जिन्होने इस कार्य में योगदान दिया है। जनभागीदारी की अपेक्षा रखते हुए आपका भी सहयोग […]
दौड़ बदलाव की
यदि मेरे यूँ नाक भौं सिकोड़ने से आप मुझे सहिष्णुता जैसा प्राचीन (और जिसे विलुप्त भी माना जा सकता है) न मान लें तो आज के युवा वर्ग पर मुझे कई मामलों में विस्मय और नाराज़गी की मिश्रित अनुभूति होती है। लड़के स्त्रियों की भांति मशरूम केश सज्जा के कामिल हैं, कानों में “बिंदास” बालियां […]

