डॉ. नार्लीकर केवल समीकरणों और ब्रह्मांडीय सिद्धांतों के वैज्ञानिक नहीं थे। वे उस पीढ़ी के प्रतीक थे, जिन्होंने विज्ञान को सामान्य जनमानस से जोड़ा।
आगे पढ़ेंपूछिए फुरसत से, फुरसतिया से
निरंतर काउंटडाउन भाग ३ नामचीन हिंदी अखबार देशबंधु में मंझे साहित्यकार और चिंतक हरिशंकर परसाई का एक कॉलम छपता था “पूछिए परसाई से” जिसमें वे पाठकों के प्रश्नों के उत्तर देते थे। तमाम किस्म के प्रश्न, राजनीति, इतिहास, समकालीन परिदृश्य, साहित्य पर जिनमें कुछ चुटीले सवाल भी शामिल होते थे। निरंतर के पहले अवतार में […]
७५ लाख पाठक हैं भारतीय भाषाओं की साईट्स के
हालिया इंडिया आनलाईन सर्वे २००६ ब्लॉगजगत के लिये उम्मीदों भरे निष्कर्ष ले कर आई है। इस सर्वे के मुताबिक भारत में तकरीबन २.१ करोड़ इंटरनेट प्रयोक्ता हैं और इनमें से ८५ फीसदी, यानि लगभग १.८ करोड़ ब्लॉग पढ़ते हैं, जिनमें ऐसे लोग भी है जो स्वयं ब्लॉगिंग नहीं करते। आंकड़ें अविश्वनीय लगते हैं पर अगर […]
विज़डम आफ क्राउड्स महज़ किताबी बात नही
निरंतर काउंटडाउन भाग 2 बिल्कुल यही वजह है कि निरंतर, सिर्फ एक मैगैज़ीन नहीं, ब्लॉगज़ीन है। निरंतर के लेखों में सिर्फ संपादक मंडल की ही नही, इसके लेखकों की ही नही वरन् आपकी राय भी सम्मिलित होनी चाहिए। इसी कड़ी में निरंतर के अगस्त अंक में प्रारंभ किया जा रहा है एक नया स्तंभ “जनमंच“। […]
एक और प्रथमः इंटरैक्टिव कहानी
निरंतर काउंटडाउन भाग १ निरंतर एक अभिनव प्रयोग रहा है। यह पहली ऐसी पत्रिका है जो न केवल गैरपेशेवर प्रकाशकों द्वारा निकाली जाती है बल्कि पाठकों को प्रकाशित लेखों पर त्वरित टिप्पणी करने का मौका भी देती है। इस तरह ये सिर्फ ज़ीन नहीं, विश्व की प्रथम ब्लॉगज़ीन बन सकी। किसी भी प्रकाशन में पाठकों […]
फिर वही तलाश
वक्त भी कैसे कैसे रंग दिखाये! कुछ साल पहले तक भारतीय मूल के हॉलीवुड फिल्म निर्माता जगमोहन मूँदड़ा अपनी सी ग्रेड फिल्मों के लिये जाने जाते थे। उनकी फिल्मों की पटकथा में कहानी का कम और सेक्स सीन्स का महत्व ज्यादा रहता था। दर्शक ऐसी फिल्मों में “काम के सीन्स” देखने के लिये ही टिकट […]
जुलाई सप्ताह ३ के स्वादिष्ट पुस्तचिन्ह
मेरा डिलिशीयस पुरालेखागार फ्यूटेफविकिपीडिया की श्रेणीवार खोज करने का औजार। हिन्दी विकिपीडिया खोज लेता तो बढ़िया होता! टैग: [cv futef search+engine wikipedia विकिपीडिया] गूगल एक्सेसिबल सर्चनेत्रहीनों के लिये गूगल का अभिनव प्रयोग जो सहजता से लोड होने वाले पृष्ठों को प्राथमिकता देता है। टैग: [accessible cv google गूगल] ह्यूमनाईज़्ड रीडरब्लॉग एग्रीगेटर जो दिखता है ब्लॉग […]
बेशर्म सरकार और नादान आईएसपीज़, शर्म शर्म!
लेकिन हमारे पास भी तोड़ है। बस इतना करें यह पता अपने ब्राउज़र पर टाईप करेंhttp://techbytes.co.in/experimental/bypass.php? url=http:// ब्लॉगस्पॉट, टाईपपैड या जीओसीटीज़ के जालस्थल पा पता आखिर में जोड़ दें। उदाहरणतः mysite.blogspot.com पर जाने के लिये पता होगा http://techbytes.co.in/experimental/bypass.php? url=http://mysite.blogspot.com/ आप तैयार हैं मनचाहा ब्लॉग पढ़ने के लिये। सरकार को ठेंगा! [साभारः अतानू]
शॉब्दोः अंग्रेज़ी-असमिया शब्दकोश
जाल पर भारतीय भाषाओं में लिखने वालों की तादात लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही आनलाईन शब्दकोशों की ज़रूरत भी। मैंने एजैक्स इनेबल्ड अंग्रेज़ी-हिन्दी आनलाईन शब्दकोश शब्दनिधि का ज़िक्र कुछ समय पहले किया था। प्रियांकू, जो कि पहले ज्ञात असमिया ब्लॉगर भी हैं, ने सूचना दी है ऐसे ही एक और शब्दकोश के […]
जून 2006 अंतिम सप्ताह के स्वादिष्ट पुस्तचिन्ह
मेरा डिलिशीयस पुरालेखागार फीड्स 2.0एक और एग्रीगेटर जो आपके पढ़ने की शैली के अनुरूप स्वयं को ढालेगा। टैग: [aggregator feed newreader न्यूज़रीडर] विम्बलडन २००६चैम्पियनशिप ने प्रकाशित की है खबरों की अपनी आरएसएस फीड। टैग: [sports tennis wimbledon]
एक महाब्लॉगर से मुलाकात
कुछ दिन पहले अनूप का ईमेल आया, बोले जिन किताबों को भेंट करने का वायदा किया था वो देने स्वयं आ रहा हूँ। ज़ाहिर है जिन चिट्ठा मित्र से अब तक केवल फोन पर बातचीत हुई या फिर चित्रों में ही जिन्हें देखा हो उनसे मिलने की बात पर मन उत्साहित तो था ही, पर […]
दवा नहीं बैसाखी
मैं तब इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष में था जब मंडल कमीशन की अनुशंसा के खिलाफ छात्र आंदोलन जोर पकड़ रहे थे। मुझे याद है, तब सीनियरों ने पकड़ पकड़ हम सब को इकट्ठा किया था और फिर भेड़ों की नाई चल पड़े थे हम “प्रदर्शन” करने। दोपहर जब पुलिसिया लाठियाँ चलीं तो जिसको जो रास्ता […]
जॉल बाचाईये, कॉल बाचाईये!
सरकारी विभागों में संदेशों की खास अहमियत है। हर साल का सरकारी बजट, काम करो न करो काम की नुमाईश करना ज़्यादा ज़रूरी है। हज़ारों योजनाओं के ज़िक्र आपको सरकारी बजट पर पनपते बिलबोर्ड, गाँव देहात में घरों और सरकारी अस्पतालों व स्कूलों की दीवारों और चिकने पृष्ठ वाली पत्रिकाओं में विज्ञापनों के द्वारा मिलेंगे। […]
युवा नेताओं की वाकई ज़रूरत है
विगत पोस्ट में राजनीति में युवा नेताओं के आगे बढ़ने की बात की तो कुछ युवा तुर्क याद आ गये। भारतीय राजनीति कि विडंबना है कि उच्च पदों की चढ़ाई एवरेस्ट की चढ़ाई करने जैसा है। जब तक चोटी के नज़दीक पहूँचते हैं शरीर जर्जर हो जाता हैं। न जिगर में महत्वाकांक्षा रहती है, न […]
सत्ता का भोग
हालिया असेंबली चुनावों के बाद काँग्रेस के हौसले बुलंद हैं। महिनों से जारी प्रक्रिया अंततः रंग ला रही है और राजकुमार के ताजपोशी के संकेत प्रबल होते जा रहे हैं। सरकारी प्रसार माध्यमों की टेरेस्ट्रीयल पहुँच बेजोड़ है, ये फ्री टू एयर हैं और यही कारण है कि कोई भी सत्तारूढ़ दल प्रसार भारती को […]
जस्ट वाना हैव फ़न
परिवर्तन का दौर है। नया आर्थिक परिवेश है। आधुनिक शहरी मानस अब न तो भारतीय रहा, न ही अमरीकी। त्रिशंकू बना बीच में ही कहीं झूल रहा है। “गर्ल्स जस्ट वाना हैव फ़न“, टाईम्स कह रहा है। “लड़कियाँ भी अब कैजुअल सेक्स से हिचकती नहीं। वन नाईट स्टैंड जोर पकड़ रहे हैं।” पल भर की […]
मई सप्ताह २ के स्वादिष्ट पुस्तचिन्ह
मेरा डिलिशीयस पुरालेखागार शेयर योर ओपीएमएलन्यूजरीडर पर आप जिन ब्लॉग्स को पढ़ते हैं औरों को भी बतायें। टैग: [cv newreader opml]
बेअदब इश्तहार
एएक्सएन पर एक कार्यक्रम आता है, जिसमें दुनिया भर से नामचीन उत्पादों के टी.वी कमर्शियल दिखाये जाते हैं। कहना न होगा कि इनमें से बहुत सारे विज्ञापन उत्तेजक होते हैं। भारतीय विज्ञापन जगत को देश में भाषा, जाति, राज्य की सेंसिबिलिटी आदि का काफी ध्यान रखना होता है। हमारे यहाँ देर रात केबल पर चाहे […]

