डॉ. जयंत विष्णु नार्लीकर को एक व्यक्तिगत श्रद्धांजलि

डॉ. नार्लीकर केवल समीकरणों और ब्रह्मांडीय सिद्धांतों के वैज्ञानिक नहीं थे। वे उस पीढ़ी के प्रतीक थे, जिन्होंने विज्ञान को सामान्य जनमानस से जोड़ा।

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बढ़ती आर्थिक असमानता: भारत के विकास मॉडल पर सवालिया निशान

भारत में अर्थव्यवस्था का स्वरूप जिस तेजी से बदल रहा है, उसमें अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है।

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कृत्रिम मेधा (AI): विरोध से परिवर्तन की ओर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति लोगों का विरोध दरअसल एक नई क्रांति की दस्तक है, जहाँ चुनौतियों को अवसरों में बदलने की कला सीखनी होगी।

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अटल व्यथा

भाजपा एक्सप्रेस भारत प्लैटफॉर्म पर लगी और उसकी रवानगी भी हो गई। इन सारे वर्षों में और हालिया घटनाक्रम से यह बात कभी भी पल्ले नहीं पड़ी कि आखिर वाजपेयी को गले लगाए रखने की भाजपाई मजबूरी क्या है। वैंकैया ने सीधे कह दिया कि व्यक्ति आधारित राजनीति अब नहीं होगी, मोदी बने रहेंगे, फिर […]

हिन्दी ब्लॉग‍ गीत

याज़ाद ने अनिल के एक चिट्ठे के हवाले से हिन्दी ब्लॉग‍ गीत की बात छेड़ी। तो अपन कहां पीछे रहने वाले थे। हाजिर है कुछ ब्लॉग गीतः ये अपने बाप्पी दा इश्टाईल में: ब्लॉगिंग बिना चैन कहां रेSSS कॉमेन्टिंग बिना चैन कहां रेSSS सोना नहीं चांदी नहीं, ब्लॉग तो मिला अरे ब्लॉगिंग कर लेSSS ..ये […]

खिसियानी बिल्ली…

सुषमा सवराज मय पतिदेव राज्य सभा से पलायन करना चाहती हैं। वे भाजपा के राजनीति के WWF में एक विदेशी से पटखनी खाने के बाद से बेचैनी महसूस कर रहीं थी। अंबिका सोनी ने चुटकी ली, “अरे परवाह कौन करता है, वैसे भी श्रीमान स्वराज के मेम्बरशिप के दो ही महीने बचे हैं।” दरअसल सारी […]

पुरस्कार पखवाड़ा

बड़ा अच्छा पखवाड़ा रहा। यूं तो पहले भी कुछ ऐसे ईनामात मिले पर इस बार काफी दिनों बाद किस्मत ने साथ दिया लगता है। पहले तो प्राप्त हुआ भाषाईंडिया की ओर से माईक्रोसॉफ्ट वायरलेस कीबोर्ड और माउस (कहना पड़ेगा कि बहुत ही शानदार चीज है, हालांकि नामुराद कुरियर वालों ने 4 बैटरियां रास्ते में ही […]

नए ब्लॉगर पर नुक्ता चीनी

नए ब्लॉगर के सलोने रूप की तारीफ तो मैं कर ही चुका हूँ, मुफ्त सेवा वालों को अनेक नई सुविधाओं जैसे टिप्पणी ‍(जो हेलोस्कैन के कारण मेरे तो किसी काम की नहीं), नए आकर्षक खाके, चिटठाकार के प्रोफाइल (जो ब्लॉगर समूह को सुदृढ करेंगे), नए टैग (मुझे पसंद आया, हाल के चिटठों वाला जिसके लिए […]

सम्पूर्ण कायापलट

आज ब्लॉगर ने हैरत में डाल दिया। उनका डैशबोर्ड न केवल काम का है बल्कि बेहद हसीन भी है। इसके अलावा सम्पूर्ण कायापलट कर दिया है ब्लॉगर ने अपने रुप में। शायद थोड़ा सा ध्यान सरलीकरण की ओर दिया गया है। क्या आपने देखा?

बात भूख की

डेनियल ने एक अनोखे वाकये का उल्लेख किया है जब भिखारियों ने दान किया जा रहा खाना यह कह कर ठुकरा दिया कि यह खाना गर्मियों के लिए उपयुक्त नहीं है। कारण जो भी हो, डेनियल का यह कहना काफी सही है कि दान के सहारे जीवनयापन करने वाले अब इससे इतने इतराए हुए हैं […]

हालिया चिटठों की कड़ियां

अगर आपने गौर किया हो तो इस चिट्ठे में दाँयीं ओर “हाल के चिट्ठे” दिखते हैं, दरअसल ये जावास्क्रिप्ट इस चिट्ठे के एटम फीड को पार्स करके बनायी गई है। अगर आप अपने ब्लॉग पर इसका उपयोग करना चाहते हैं तो निम्नलिखित कोड यथास्थान पर पेस्ट कर दें। ब्लॉगर.कॉम वाले तो इसका सीधा प्रयोग कर […]

नए पड़ाव

खुशी की बात है कि हिन्दी ब्लॉग के काफिले में नए राही जुड़ते जा रहे हैं। नवागंतुक वैभव पाण्डेय का स्वागत है। इस बीच नजर पड़ी ब्लॉगडिग्गर पर। जानकर अच्छा लगा कि यह कोई साधारण एग्रीगेटर नहीं वरन आपको चिट्ठों का समूह बनाने में भी मदद करता है। ऐसा समूह बनाने का एक लाभ यह […]

काव्यालय ~ इस सफ़र में

मैंने कवि बनने की अपनी नाकाम कोशिशों का ज़िक्र इस चिट्ठे पर कभी किया था। उन दिनों गज़ल लिखने पर भी अपने राम ने हाथ हाजमाया, बाकायदा तखल्लुस रखते थे साहब, बेबाक। तो उन्ही दिनों की एक गज़ल यहां पेश है। अगर उर्दु के प्रयोग में कोई ख़ता हुई हो तो मुआफी चाहुँगा। इस सफ़र […]

रहिमन माया संतन की..

उज्जैन में सिंहस्थ की खबरों में बड़ा अजीब विरोधाभास नजर आता है। भई, बचपन से हम को तो यही सिखाया-बताया गया है कि साधु वैराग का दूसरा नाम होते हैं; मोह-माया, मानवीय कमजोरियों, वर्जनाओं से परे, गुणीजन होते हैं। हो सकता है कि कलियुग की माया हो, वरना मुझे तो ऐसे कुछ संकेत दिखे नहीं। […]

बॉलीवुड और चोरी की प्रेरणा

मेहमान का चिट्ठा: हेमन्त विगत दिनों जब बार्बरा टेलर ने सहारा टीवी के धारावाहिक करिश्मा को कॉपीराईट उल्लंघन के आधार पर बंद करवाने की धमकी दी थी तो बॉलीवुड में सपने बुनने के कारखाने को तो जैसे साँप सूँघ गया था। हालाँकि बाद में बार्बरा मान‍ मनोव्वल से बस में कर ली गईं पर इस […]

बकाया बातें

फिर वही दौर जब चिट्ठे पढ़ता तो हूँ पर कुछ लिखने का जी नहीं करता। ऐसे में सोचा कुछ बकाया बातें कर ली जाएं। पहले हिन्दी के तकनीकी शब्दों के प्रयोग से संबंधित एक बात। शायद आप को ञात हो, की सूचना प्रोद्योगिकी से संबंधित शब्दों के अंग्रेज़ी से हिन्दी मान्य तजुर्मे यहां उपलब्ध है। […]

हम ब्लॉग

प्राकृत भाषा में ब्लॉग की बात करें तो निःसंदेह अगुआई का सेहरा तमिल भाषियों के सर बंधेगा। हिन्दी चिट्ठों के संसार में नई लहर उठे अभी शायद कुछ माह ही हुए हैं, आलोक ने भी तकरीबन १ साल पहले अपना हिन्दी चिट्ठा शुरु किया था, पर तमिल भाषा में कई चिट्ठाकारों ने मिलकर इस आंदोलन […]

बस आगे बढ़तें रहें

पंकज के मुवेबल टाइप के अनुवाद के दौरान हुई चर्चा में मैंने या विचार रखे थे कि log, trackback, preview, template, password, username, archives, flag, bookmarklet जैसे पारिभाषिक शब्दों को जस का तस लिखना चाहिए, हर शब्द का हिन्दीकरण उचित नहीं। पंकज का मानना है: मैं सोचता हूँ कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए जो कि […]

कश्मीर और पाकिस्तानी अंर्तविरोध

मेहमान का चिट्ठाः नितिन मेरा यह मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपने भारत-विरोध को छोड़ खुद अपनी राह पर नहीं चलता तब तक उप-महाद्वीप में पूर्ण शांति की आशा नहीं की जा सकती। 1947 के बाद चाहे-अनचाहे पाकिस्तान एक स्वतंत्र राष्टृ बन गया है, यह एक सत्य है। लेकिन स्वतंत्र पाकिस्तान की अपनी स्वतंत्र […]

काव्यालयः बनकर याद मिलो

कॉलेज के दिनों में हर कोई कवि बन जाता है, कम से कम कवि जैसा महसूस तो करने लगता है। जगजीत के गज़लों के बोलों के मायने समझ आने लगते हैं और कुछ मेरे जैसे लोग अपनी डायरी में मनपसंद वाकये और पंक्तियाँ नोट करने लगते हैं। कल अपने उसी खजाने पर नज़र गयी तो […]