नुक्ताचीनी


निरंतर पत्रिका के पुराने अंक नष्ट

By Debashish • May 1st, 2007 • Category: व्यक्तिगत

मेरी मूर्खता की वजह से निरंतर पत्रिका के अक्षरग्राम पर रखे पुराने अंक पूर्णतः नष्ट हो चुके हैं और हमारे पास पुराने अंकों का कोई भी बैकअप उपलब्ध नहीं है। ये शायद मेरे जीवन का सबसे दुखदायी दिन है, काश टालमटोल करने की बजाय मैं पुराने अंकों के बैकअप पहले ही रख लेता।

यदि आपके पास निरंतर के पुराने अंक (जो http://nirantar.org पर उपलब्ध हैं उनसे पहले के अंक) या उन अंकों के लेख उपलब्ध हों तो मुझे debashish at gmail.com पर ईमेल कर भेज दें। आपके प्रयास से शायद वे अंक हम बचा सकें।

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लेखक: Debashish

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9 टिप्पणीयाँ »

  1. बहुत दुख हुआ. मेरे पास तो एक भी अंक नही है. :( माफी चाहता हुँ.

  2. यह तो बहुत ही दुखदाई घटना है। अब मैं क्या बताऊं लंबे समय से सोचता था कि कभी बैठकर निरंतर के सारे पुराने अंक पढूंगा। बहुत बार शुरु किया फिर सोचा चलो किसी दिन बाद में तसल्ली से पढ़ेंगे।

    Archive.org पर भी कुछ खास नहीं है, , 2

    इस वक्त आप की हताशा समझ सकता हूँ। क्या अक्षरग्राम की दूसरी साइटों के साथ निरंतर का बैकअप नहीं होता था ?

  3. क्या गूगल पर Cache सर्च के ज़रिए कुछ वापस पाया जा सकता है? यदि हां तो इस काम में अपन लग सकते हैं. कुछ टोटके बता दीजिए.

  4. दुःख की बात यही है कि साईट का पता तकरीबन 1 साल से बदल गया था और सार्वजनिक नहीं था अतः गूगल कैश में कुछ नहीं है। archive.org पर भी, जैसा कि श्रीश ने कहा, केवल मुखपृष्ठ ही संरक्षित है। हमें सारे चित्र तो मिल गये हैं पर मसौदे का यानी डेटाबेस का कोई बैकअप नहीं था।

    निरंतर का बैकअप क्यों नहीं रखा गया और क्यों समूची साईट मय डेटाबेस डिलीट हो गई ये तो पंकज ही बता सकते हैं। पर निःसंदेह सारा दोष मेरा ही है क्योंकि निरंतर के सृजक के तौर पर मुझे ही इसका ख्याल रखना था। मैं दरअसल आहिस्ता आहिस्ता सारे अंक nirantar.org पर ला रहा था, पहला अंक मेरे पास है पर समयाभाव के कारण शेष काम टलता गया। चुंकि pnarula.com/akshargram-com/nirantar पत्रिका पर उपलब्ध थी तो मैं यही सोचता रहा कि काम समय मिलते रहने पर निबटाता रहुंगा। पिछले सप्ताहांत भी मैं एक और अंक को स्थानांतरित करने ही गया था, पर ये जान कर सदमा लगा की साईट इंस्टाल ही नहीं डेटाबेस भी हटा दिया गया है।

    बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना जिससे शायद हम सभी को सबक मिले।

  5. भैया मूर्खता में मैं भी शामिल हूँ। अक्षरग्राम के अपने होस्ट पर जाने के बाद एक दिन सफाई करने की सूझी। सर्वज्ञ, नारद, निरंतर सभी अपने अपने नए स्थानों पर जा चुके थे इसलिए सोचा की झाड़ू मार देता हूँ। पर निरंतर के लिए गलती हो गई। भाईयो माफी चाहता हूँ।

    अपने वेबहोस्ट से बैक अप रिस्टोर करवाने की कोशिश कर रहा हूँ देखता हूँ कैसे रहता है।

    पंकज

  6. अपने वेबहोस्ट से बैक अप रिस्टोर करवाने की कोशिश कर रहा हूँ देखता हूँ कैसे रहता है।

    हाँ कृपया कोशिश करें और परिणाम से हमें भी अवगत कराएं। निरंतर के पुराने अंकों का नष्ट होना एक शानदार इतिहास का खत्म होना है।

  7. वेबहोस्ट ने जवाब दे दिया :(

  8. सत्यानाश.

  9. […] स्थित हमारे पूर्व सर्वर से नष्ट हो गये थे। ये अंक द्रुपल आधारित सिविकस्पेस […]

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