नुक्ताचीनी ~ Hindi Blog


Archive for the ‘मनभावन’ Category

भैया बोलके कचरा नई करने का!

By Debashish • Jul 4th, 2008 • Category: मनभावन

आज ईमेल फॉर्वर्ड से प्राप्त



सुरक्षा का आभास?

By Debashish • Aug 12th, 2007 • Category: मनभावन

मेटाकैफे पर ये शानदार विडियो देखा, भारत में ही बना प्रतीत होता है। हाथी पर बैठे वन्यजीवन टूरिस्ट सुरक्षित दूरी से बाघ देखने आये हैं। पर क्या इतनी दूरी सुरक्षित दूरी थी? मेटाकैफे की साईट पर एक पाठक ने संजीदा टिप्पणी की, “भला हो महावत के पास बाँस की छोटी सी डंडी थी जिसकी मदद [...]



मैन विथ अ ब्रीफकेस

By Debashish • Jul 6th, 2007 • Category: मनभावन

आफिस जाते वक्त वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (डब्ल्यूटीसी) के पास बने लिबर्टी पार्क से गुजरता हूँ और वहाँ हमेशा एक सूटेड बूटेड साहब बैंच पर बैठे मिलते हैं, अपने ब्रीफकेस में कुछ खोजते हुये। लोग उनके साथ बैठ कर, गले में हाथ डालकर या बाल सहलाते हुये फोटो खिंचवाते हैं। ये साहब यहाँ बरसों से जमे [...]



गया गया गया

By Debashish • Apr 2nd, 2007 • Category: मनभावन

नेटभ्रमण के दौरान आज भाषा प्रयोग के विषय में कुछ मज़ेदार बातें पता चली, शायद आपको पता हो। “होमोनिम्स” ऐसे शब्द होते हैं जिनका उच्चारण और हिज्जे समान हों पर अर्थ अलाहदा होते हों। अंग्रेज़ी में तो ऐसे शब्दों की भरमार है जैसे कि bank जो कि नदी के किनारे, बिजली के स्विच की कतार [...]



काव्यालय ~ इस सफ़र में

By Debashish • Apr 21st, 2004 • Category: मनभावन

मैंने कवि बनने की अपनी नाकाम कोशिशों का ज़िक्र इस चिट्ठे पर कभी किया था। उन दिनों गज़ल लिखने पर भी अपने राम ने हाथ हाजमाया, बाकायदा तखल्लुस रखते थे साहब, बेबाक। तो उन्ही दिनों की एक गज़ल यहां पेश है। अगर उर्दु के प्रयोग में कोई ख़ता हुई हो तो मुआफी चाहुँगा। इस सफ़र [...]