नुक्ताचीनी ~ Hindi Blog


पर्सनलाईज़्ड जुगाड़

By • Apr 5th, 2006 • Category: बातें तकनीकी, ब्लॉगिस्म

Hindi Bloggers Google Moduleआप जानते होंगे कि गूगल के परंपरागत गृहपृष्ठ को आप पर्सनलाईज़ यानी अपनी पसंद के मुताबिक ढाल सकते हैं। पहले तो खबरों की फीड, आज का शब्द जैसे मॉड्यूल ही उपलब्ध कराये गये थे पर अब आप गूगल की निर्देशिका से सेंकड़ों ऐसे मॉड्यूल्स में से अपना मनपसंद चुन सकते हैं और उसे अपने पर्सनलाईज़्ड पृष्ठ पर डाल सकते हैं। ये माड्यूल दरअसल केवल क्षमल फाइलें हैं जो विभिन्न श्रोतों से मसौदा लाकर दिखा सकती हैं, तो ज़ाहिर तौर पर आप एटम या आरएसएस फीड का भी प्रयोग कर सकते हैं।

हिन्दी चिट्ठाकारों की सूची ब्लॉगरोल की तईं दिखलाने का एक जुगाड़ मैंने पहले बनाया था जो शायद आप प्रयोग भी कर रहे हों, अब इसी का इस्तेमाल मैंने एक मॉड्यूल बनाने के लिये किया जिससे आप दिखाये गये चित्र के अनुसार अपने गूगल पर्सनलाईज़्ड पृष्ठ पर डाल सकते हैं। बस गूगल के खाते में लॉगिन करें और नीचे दिया बटन दबायें ये खुद ब खुद आपके पृष्ठ पर हाज़िर हो जायेगा, आप फिर इसे यथास्थान रख सकते हैं। है न काम का जुगाड़?

Add to Google

Tagged as: , , , , ,

 

6 टिप्पणीयाँ »

  1. तुस्सी ग्रेट हो पा जी!
    मजा आ गया।

  2. “माय याहू” इसकी (गूगल पर्सनलाइज्ड्) तुलना में कैसा है ? मैं तो इसी से संतुष्ट हूँ |

  3. जीतूः आपकी तारीफ का हमेशा इंतज़ार रहता है, शुक्रिया फिर।
    अनुनादः माई याहू का मेरा पृष्ठ मैं खास प्रयोग नहीं करता। अच्छा तो वह भी है, तमाम फीड्स सब्सक्राईब कर सकते हैं पर गूगल मॉड्यूल्स के खासियत यह कि मेरे जैसा कोई बंदा भी आसानी से बना कर जाल पर डाल सकता है। गूगल याहू की तुलना तो खैर सतत चर्चा का विषय है ही, पर मेरे ख्याल से दोनों की अपनी खास बात है।

  4. सही जुगाड़ है!!

    मैं तो कोई निजिकृत गृहपृष्ठ इस्तेमाल करता ही नहीं, इसलिए अपने किसी काम का नहीं है!! 🙂

  5. अमित: जुगाड़ तो जुगाड़ है, जिसके काम का होगा इस्तेमाल कर लेगा। इसके लिये कोई तुमसे चंदा उगाह रहा है क्या? बुरा न लगे तो इतना ज़रूर कहूंगा कि मुँहफट होना हमेशा गुण नहीं कहलाता।

  6. अरे देबू दा, आप तो बेकार में नाराज़ हो रहे हो। मैंने तो बस यही कहा कि सही जुगाड़ होते हुए भी यह अपने काम की चीज़ नहीं है, बस। इसमें नाराज़ होने वाली क्या बात आ गई? यदि आपको बुरा लगा तो क्षमा करना, मेरा कोई गलत मतलब नहीं था और न ही मैं मुँहफ़ट बन रहा था। 🙂