विज़डम आफ क्राउड्स महज़ किताबी बात नही
By Debashish • Jul 25th, 2006 • Category: ज़िंदगी आनलाईन, व्यक्तिगतनिरंतर काउंटडाउन भाग 2
बिल्कुल यही वजह है कि निरंतर, सिर्फ एक मैगैज़ीन नहीं, ब्लॉगज़ीन है। निरंतर के लेखों में सिर्फ संपादक मंडल की ही नही, इसके लेखकों की ही नही वरन् आपकी राय भी सम्मिलित होनी चाहिए। इसी कड़ी में निरंतर के अगस्त अंक में प्रारंभ किया जा रहा है एक नया स्तंभ “जनमंच“। “जनमंच” […]




