नुक्ताचीनी ~ Hindi Blog


तीर निशाने पर

By • Sep 3rd, 2006 • Category: ब्लॉगिस्म, ज़िंदगी आनलाईन

Tarakashबेंगाणी बंधुओं की मेहनत रंग लाई है और तरकश नये नवेले स्वरूप में समूह बलॉग के रूप में प्रस्तुत किया गया है। तरकश का नया रूप और कलेवर मनोहारी है, छवि की टीम है ही होनहार कलाकारों का जमावड़ा। तरकश में पंकज, संजय और रवि जैसे पुराने खिलाड़ी तो हैं ही, ब्लॉगिंग के बाण साधने निधि, समीर और सागर जैसे सधे तीरंदाज़ भी दल में शामिल किये गये हैं। फिलहाल यहाँ १२ से अधिक चिट्ठे हैं पर सच्चा समूह ब्लॉग बनाने के लिये इसमें श्रेणीवार प्रविष्टियाँ दिखाने और खोजने की व्यवस्था करनी होगी। साथ ही आशा है कि वर्तनी का भी ध्यान रखा जायेगा 😉

तरकश पर लगे विज्ञापन हिन्दी ब्लॉगिग के नये रूख की ओर संकेत करते हैं, मुझे लगता है कि ऐसे जालस्थलों को लंबी रेस का घोड़ा बनाने के लिये इन्हें स्वपोषित करना ज़रूरी भी है, हालांकि पंकज ने कहा है कि वे निकट भविष्य में इस जालस्थल से कमाई होने की कोई संभावना नहीं पाते और फिलहाल तरकश को चलाने का खर्च इनकी संस्था छवि ही वहन करेगी।

आशा है कि आगामी समय में यह समूह ब्लॉग सफलता और यश दोनों प्राप्त करेगा। मेरी ओर से तरकश के दल को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें!

 

5 टिप्पणीयाँ »

  1. आदरणीय देबू दा
    इस अनाड़ी को भूल गये, 🙂
    मंजे हुए लेखकों की टीम में एक मसखरा भी होना चाहिये कि नहीं? इस वजह से हम भी इस टीम में हैं।

  2. हाँ,यह वास्तव में बहुत अच्छी बात है कि यह समूह ब्लाग बना। इससे जुड़े सभी लोगों को बधाई!

  3. तरकश नये स्वरूप में वाकई अधिक आकर्षक और बेहतर है। मुझे आशा है कि यह मंच चिट्ठाकारों में सामूहिक प्रतिबद्धता के विकास का एक नया अध्याय जोड़ेगा। हमलोग पिछले चिट्ठाकार सम्मेलन में दिल्ली के चिट्ठाकारों का इसी तरह का समूह ब्लॉग विकसित किए जाने पर विचार कर रहे थे।

  4. देबुदा,

    आपने हमारे बारे में लिखकर हमें अनुग्रहित किया है। आप जैसे वरिष्ठ मित्रो के सक्रीय सहयोग के बिना इस तरह के प्रयास कर पाना नामुमकिन हो जाता। मै कुछ जोडना चाहुंगा –
    1. तरकश को हम समूह ब्लोग नहीं बनाना चाहते. तरकश उससे कहीं अधिक होगा. रोजमर्रा की जो पोस्ट निजी ब्लोग में की जाती है वैसी तरकश पर प्रकाशित नही की जाएगी.
    2. कई सारे नए स्तम्भ, लेखक और कडीयाँ तरकश में जुडने वाली है.
    3. आपने जिन कमीयों के बारे में कहा वो विचारणीय है. हमारी मुख्य समस्या प्रोग्रामिंग का अल्प नही वरन अति अल्प ज्ञान है. छवि भी प्रोग्रामिंग कम्पनी नही है. लेकिन हम सिख रहे हैं। हमारी नई प्रोग्रामिंग टीम भी बन रही है। और फिर आप लोग तो है ही।

  5. पंकज: आपकी नम्रता के लिये शुक्रिया! मुद्दे तकनीकी हों या गैर तकनीकी चिट्ठाजगत के सभी मित्र आपके इस कार्य में अंशदान और सहयोग अवश्य देंगे। तरकश के भावी स्वरूप को देखने जानने की उत्सुकता बनी रहेगी।
    सागरः भूलसुधार कर लिया गया है।