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फ़ेसबुक, बाबा और क्रिसमस भंडारा

By • May 26th, 2008 • Category: आसपास

अब यह तो आपको मालूम चल ही गया होगा की फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग हाल ही में भारत आये थे। कयास लगे थे कि फ़ेसबुक का भारतियों में बेतहाशा लोकप्रिय आर्कुट से इसी धरती पर दो दो हाथ करने का इरादा बना है। गप्पें छापने वाली वेबसाईट टेकगॉस ने उनकी तस्वीर लाने वाले को दस हज़ार ईनाम देने की घोषणा कर डाली। पर सारे कयासों के बीच असलियत यह निकली कि मार्क दरअसल भारत आये थे अपने आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा से आशीष मांगने।

इन बाबा का मैंने तो कभी नाम न सुना था, वैसे भी अपन बाबाओं से दूर ही रहते हैं, पर ये कोई साधारण बाबा नहीं हैं। वैलीवैग, जिसने इस खबर का खुलासा किया का कहना है कि एप्पल के स्टीव जॉब्स और गूगल के लैरी पेज तक बाबा के दर्शन कर चुके हैं। और बाबा इस बाजार के प्रति काफी “सजग” हैं। ज़ाहिर है बाबा के “दूरसंपर्क” के सारे मौजूद हैं।

बाबा भारत में तो बाबा नीब करोड़ी के नाम से जाने जाते हैं पर विदेशी भगत उन्हें नीम करोली पुकारने लगे। इन सरल, सच्चे, सांसारिक मोहमाया से मुक्त बाबा की तीन वेबसाईटें तो इस नाचीज ने ही खोज निकालीं जो neemkarolibaba.com, neebkaroribaba.com और neebkaroribaba.org पर हैं। कहना न होगा कि इनकी “देखभाल” समितियाँ और ट्रस्ट करती हैं।

तो मार्क अपने बाबा से क्या माँगने आये थे? अगर हाल में ट्विटर की बढ़ते उपभोक्ताओं के बोझ से हुई दुर्दशा का भान होता तो शायद वे फ़ेसबुक की अच्छी सेहत और स्केलेबिलीटी सामर्थ्य मांगते पर अभी तो शायद आर्कुट पर विजय ही मांगी होगी। बाबा के प्रख्यात भगतों में शामिल होने का तमगा मिला सो अलग।

बस एक सवाल अपन राम के मन में चुभ रहा हैः जब लैरी और मार्क दोनों ही बाबा के अनन्य भक्त हैं तो बाबा ने आशीर्वाद का पलड़ा किस तरफ झुकाया होगा, आर्कुट या फ़ेसबुक। इसका जवाब तो शायद चंदे की रसीद देख कर ही पता लगे।

बहरहाल, आप का सवाल होगा कि इस प्रविष्टि के शीर्षक में ये क्रिसमस भंडारे का क्या चक्कर है। तो इसके लिये आप http://www.neebkaroribaba.com पर जायें और समझ पायें तो मुझे भी बतायें 😉

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2 टिप्पणीयाँ »

  1. यह वही चीज़ है – अमरीका जाओगे तो कहाँ जाओगे – डिज़्नीलैण्ड। हिन्दुस्तान जाओगे तो? गूगल मारो – हाँ ये मिल गए। वैसे तो और भी हैं, इनका सर्वाधिकार नहीं है

    दलेर मेहन्दी के गानों को लोग पञ्जाब के बाहर पसन्द करते हैं, पञ्जाब में गुरदास मान ही चलता है। यह उसी तरह की चीज़ है।

    लेकिन कुछ लोगों को बाबाओं की ज़रूरत नहीं पड़ती है।

  2. बांकी सब तो नहीं मालूम.लेकिन बाबा जी का मंदिर कैंची (नैनीताल,मेरे घर के रास्ते में) में भी है. जिसे देखने का अलग ही आनंद हैं. बहुत ही खूबसूरत मंदिर है.

    बाबा तो समधिस्थ हो गये हैं लेकिन उस इलाके में उस मंदिर और बाबा की बहुत मान्यता है. कभी इस पर एक अलग से पोस्ट लिखुंगा.