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Archive for the ‘ब्लॉगिस्म’ Category

ज़ेमांटा द्वारा अपनी ब्लॉगिंग में चार चाँद लगायें

By Debashish • May 24th, 2008 • Category: ताज़ातरीन पोस्ट, ब्लॉगिस्म, व्यक्तिगत

ज़ेमांटा एक ब्राउज़र आधारित सिमेंटिक अनेलिससि इंजन है जो ब्लॉग पोस्ट लिखते समय लेखक को प्रासंगिक कड़ियाँ, चित्र, सामग्री और टैग सुझाता है जिससे पोस्ट लिखना बच्चों के खेल बन जाता है। फिलहाल यह केवल अंग्रेज़ी चिट्ठों के ही काम का है और केवल फायरफाक्स पर ही चलता है, पर यह लगभग सभी लोकप्रिय ब्लॉगिंग प्लैटफॉर्म जैसे ब्लॉगर, वर्डप्रेस, आदि के लिये उपलब्ध है। पढ़िये ज़ेमांटा के बारे में रोचक जानकारी। आप यह प्रविष्टि पॉडभारती पर सुन भी सकते हैं।



वर्डप्रेस और मूवेबल टाईप की ट्विटर कुश्ती

By Debashish • Mar 12th, 2008 • Category: ब्लॉगिस्म

वर्डप्रेस 2.5 के बारे में ब्लॉगमंडल में खासी चर्चा है। इसका बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है और इसके थीम व प्लगिन में भारी तोड़फोड़ की आशंका है। खैर इस सारे घटनाक्रम से सिक्स अपार्ट बड़ा झल्लाया हुआ है, उल्लेखनीय है कि संस्थान ने मूवेबल टाईप प्रकल्प को गत दिसंबर में ही ओपन सोर्स घोषित [...]



फूलों की सेज नहीं ब्लॉगिंग

By Debashish • Feb 14th, 2008 • Category: ब्लॉगिस्म

दैनिक भास्कर के भोपाल संस्करण में छपे ब्लॉग परिशिष्ट के बारे में संजय ने लिखा ही है। जैसा सिरिल ने लिखा, सभी ब्लॉग व जालपतों को सही सही लिखने वाला शायद ये पहला अखबारी प्रयास होगा। इसके लिये रवि भैया और अजीत भाई को साधुवाद! मुझसे ब्लॉगिंग के कृष्ण पक्ष पर प्रकाश डालता एक बॉक्स [...]



कितने आदमी हैं?

By Debashish • Oct 23rd, 2007 • Category: ब्लॉगिस्म

चिट्ठाकार समूह पर अनुनाद ने सूचना दी कि वेबदुनिया भारतीय भाषाओं में अपना ब्लॉगिंग प्लैटफार्म शुरु करने जा रहा है (हालांकि अपनी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने “प्लेटफार्म” की बजाय “ब्लॉग” लिखना उचित समझा जिससे ये समझ आता है कि बड़े समूहों को भी ब्लॉगिंग की वो बात समझ नहीं आ रही जो सामान्य चिट्ठाकारों को [...]



वर्डप्रेस 2.2 अपग्रेड ने किया कचरा

By Debashish • Jul 1st, 2007 • Category: बातें तकनीकी, ब्लॉगिस्म

2.2 वर्डप्रेस की महत्वाकांक्षी रीलीज़ है जिसमें इस ब्लॉगवेयर में अनेक सुधार किये गये हैं। हालांकि वर्डप्रेस के हर नये रीलीज़ को तुरंत स्थापित करने की गलती कभी नहीं करनी चाहिये क्योंकि प्रयोक्ता समुदाय की राय जैसे जैसे सामने आती है वे पुनः कई बदलाव करते हैं। ज़ाहिर है प्रयोक्ता समुदाय से बड़ा जाँच दल [...]