नुक्ताचीनी ~ Hindi Blog


Archive for September, 2005

अब तो छोड़ो मोह!

By • Sep 11th, 2005 • Category: किस्से कुर्सी के

हाल ही में हास्य कवि प्रदीप चौबे के दो‍ लाईना पर पुनः नज़र पड़ीः काहे के बड़े हैं, अगर दही में पड़े हैं। सत्ता को लालायित भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बारे में यह काफी सटीक वचन हैं। सत्ता से विछोह के बाद से उपरी तौर पर सुगठित दिखने वाले संगठन की अंदरूनी दरारें तो […]



मंगल पर दंगल

By • Sep 9th, 2005 • Category: रुपहली दुनिया

कहने को तो हम एक मुक्त समाज हैं, जहाँ हमें बोलने की मुकम्मल आज़ादी है पर यही आज़ादी बहस के नाम पर रोक टोक लगाने के भी काम आ जाती है। फिल्में तो ऐसे मामलों में ज्यादा प्रकाश में आती हैं। कभी आपत्ति फिल्म के टाईटल पर तो कभी एतराज़ कथानक या किरदार पर। आमिर […]



अब अबला कहाँ?

By • Sep 4th, 2005 • Category: रुपहली दुनिया, आसपास

फिल्म माई वाईफ्स मर्डर में अनिल कपूर के निभाये पात्र के हाथों अपनी पत्नी का कत्ल हो जाता है। यह फिल्म वैसे किसी चर्चा के लायक नहीं हैं, पर स्टार के ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो में व्यंग्य किया गया कि जहाँ महिलायें कथानक में गुस्सेल पति के बड़ी आसानी से छूट जाने पर खफा हैं […]



पौ बारह

By • Sep 2nd, 2005 • Category: ब्लॉगिस्म

और मुझे लगता था कि ब्लॉगिंग कर भारी पैसा नहीं बनाया जा सकता। डैरेन हर रोज लगभग २३००० रुपये कमाते हैं।